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चंपाई को हटाने की झटका झामुमो को पड़ेगी महंगी, फिर भाजपा सत्तासीन होने की राह पर 
 

8/28/2024 6:09:50 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dhanbad : आगामी 30 अगस्त के बाद चम्पाई सोरेन के भाजपा में जाने के  झारखंड की राजनीतिक परिदृश्य परिवर्तित हो जाएगी। भाजपा की नई चाल ने झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले हीं अपना रंग दिखान शुरू कर दिया है। झारखंड की वर्तमान सत्ताधारी सरकार अर्थात झामुमो की सरकार को आगामी विधानसभा चुनाव में एक बड़ा झटका तब लगेगा जब कोल्हान से उसकी सीटें खिसकने लगेगी । क्योंकि कोल्हान में झारखंड मुक्ति मोर्चा का  मुख्य स्तंभ चंपाई सोरेन उर्फ़ वहां के टाइगर  ने पाला बदलकर भाजपा में आ रहें हैं । परिवारवाद  के तहत उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाकर फिर से हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बनाना झामुमो के लिए  विधानसभा चुनाव में एक बड़ा झटका देगा। क्योंकि झामुमो की चुनावी गणित में कोल्हान की एक महत्वपूर्ण भूमिका रहती आई है। वर्तमान झामुमो सरकार आज अगर सत्ता में खड़ी है तो उसका एक स्तंभ कोल्हान भी रहा है। कोल्हान में शिबू सोरेन के पूराने साथी चंपाई सोरेन हमेशा से जीत हासिल करते रहे हैं । कोल्हान में जमशेदपुर सहित इर्द गिर्द के तमाम इलाके जो झामुमो की झोली में मिलती आई है वह मुख्यमंत्री विवाद को लेकर इस बार खिसकनी तय है  अर्थात कोल्हान से मिलने वाली सीटें इस बार झामुमो के झोली में ना आकर भाजपा की झोली में जाएगी। क्योंकि कोल्हान क्षेत्र में टाइगर के नाम से प्रचलित चंपाई सोरेन इस बार समझौता भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ेंगे। इस प्रकार उक्त क्षेत्र में जहां आदिवासी और अनुसूचित जाति के मामले में भाजपा कमजोर पड़ रही थी उसकी ताकत बढ़ेगी। कोल्हान का फायदा झारखंड मुक्ति मोर्चा को पिछड़ने और भाजपा को मजबूत करने के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इस प्रकार यह तय हो गया है कि इस बार झारखंड की विधानसभा चुनाव में एक बार संभवतः फिर से भाजपा की वापसी राज्य में हो सकती है। चंपई सोरेन को हटाकर फिर से हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री की पद पर बैठना इस बार झामुमो को निश्चित रूप से महंगी पड़ेगी। झारखंड में भाजपा की फिर से सत्ता आने की स्थिति में यहां भी डबल इंजन की सरकार प्रभावी होगी और यह कदम राज्य के हित के लिए हो सकता है। लोकसभा चुनाव के समय झारखंड के बारे में प्रधानमंत्री द्वारा किए गए कई वादे पर कार्यान्वयन के आसार बन रहे हैं। इस बार फिर से राजनीतिक स्पर्धा में झारखंड मुक्ति मोर्चा का पिछड़ने और भाजपा का सत्तासीन  होने की संभावना को प्रबल बना रही है। हालांकि यह सब अब तक केवल राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान भर है। क्योंकि अनुमान परिस्थितियों बदलने पर बदल जाती है। इस बार इसके बदलने का मुख्य कारण होगा झामुमो का अपने पूराने सिपाही चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री पद से उतार कर एक बार फिर हेमंत सोरेन को गद्दी पर बैठना है।
 
उमेश तिवारी कोयलांचल लाइव डेस्क