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और दुमका रेलवे स्टेशन के नामपट्ट को लेकर बढ़ा विवाद आदिवासी ग्रामीणों में आक्रोश हुई तेज 

3/17/2025 3:14:54 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dumka  : दुमका रेलवे स्टेशन के नामपट्ट(साइन बोर्ड) में संताली भाषा के ओलचिकी लिपि से अब तक नही लिखे जाने पर विभिन्य आदिवासी गांवो आक्रोश बढ़ता जा रहा है। संताली भाषा के ओलचिकी लिपि से लिखा रेलवे स्टेशन का नाम मिटाने वाले अपराधियों का पुतला दहन और कड़ी-से-कड़ी सजा देने की मांग,दुमका और राज्य के संताल बाहुल्य क्षेत्र के छुटे सरकारी भवनों के नामपट्ट पर संताली के ओलचिकी लिपि से भी लिखने की मांग  की गई। हाल के ही दिनों में असामाजिक अपराधी तत्वों द्वारा आदिवासी संताली भाषा के ओलचिकी लिपि से लिखा दुमका रेलवे स्टेशन के नामपट्ट(साइन बोर्ड) से मिटा दिया गया है। रेलवे विभाग के अश्वासन के बाद भी अभी तक दुमका रेलवे स्टेशन का नाम संताली के ओलचिकी लिपि से नही लिखा जाने से आदिवासी समाज के गांवों में आक्रोश और रोष और बढ़ रहा है। एक तरफ सभ्यता संस्कृति भाषा को बचाए रखने की वकालत की जाती है वहीं दुमका में अपनी भाषा के अपमान को लेकर आदिवासी समुदाय आंदोलन के मूड में है। जबकि पूर्व में इस भाषा में सभी दफ्तर के बोर्ड पर लिखा गया था लेकिन अब मिटा दिया गया है।पूर्व में ओलचिकी लिपि में सभी दफ्तर के बोर्ड लिखा गया था। लेकिन बीते दिन हिजला मेला में इस भाषा में बैनर नहीं लगाने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा कहा जब जनजातीय समाज के संस्कृति को बचाए रखने के लिए मेला का आयोजन किया जा रहा है तो आखिर ओलचिकी लिपि को क्यों विलुप्त किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर दुमका जिला के मसलिया और जामा प्रखंड के कई गांव जैसे  पलासबनी,झिलुवा,नवाडीह, झुझको,मसलिया,उपरबहाल आदि गांव में ग्रामीणों ने अपने-अपने गांव में सामाजिक परम्परा के अनुसार कुल्ही दुरुप(बैठक) कर रेलवे प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त किया और मांग किया है कि जल्द से जल्द  दुमका रेलवे स्टेशन के नामपट्ट(साइन बोर्ड) में संताल आदिवासियों के संताली भाषा के ओलचिकी लिपि से भी स्टेशन का नामपट्ट(साइन बोर्ड) पुनः लिखा जाय। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि ओलचिकी से लिखा दुमका स्टेशन का नाम को मिटाने वाले असामजिक अपराधी तत्वों ने समाज के समरसता को बिगाड़ने का कोशिश किया है। यह कृत्य न केवल संताली भाषा,लिपि और आदिवासी संस्कृति का अपमान करता है, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा आघात है।  यह केवल एक भाषा,लिपि या साइन बोर्ड की बात नहीं है, बल्कि यह आदिवासी के पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का विषय  है । इसलिय इन अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिया जाय। ग्रामीणों ने स्टेशन में  संताली ओलचिकी से लिखा स्टेशन का नाम मिटाने वाले सभी असामजिक अपराधिक तत्वों का पुतला दहन किया और सीधा संदेश दिया कि संताल आदिवासी के सभ्यता,संस्कृति,भाषा,लिपि का अपमान आदिवासी समाज कतई बर्दाश नही करेगा। रेलवे इसके साथ-साथ ग्रामीणों ने दुमका प्रशासन और सरकार से मांग किया कि झारखण्ड सरकार के कार्मिक,प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के पत्रांक 15/विविध-01-02/2019 का.-1359 , दिनांक 13-02-2019 के अनुसार संताल बाहुल्य क्षेत्रो में सरकारी कार्यालयों/भवनों के नामपट्ट में संताली भाषा के ओलचिकी लिपि में भी कार्यालय/भवन का नाम अंकित करने का दिशा निर्देश प्राप्त है। उसके बाद भी अभी तक दुमका जिला के साथ राज्य के अन्य संताल बाहुल्य क्षेत्रो के कई कार्यालयों में नामपट्ट संताली के ओलचिकी लिपि से नही लिखा गया है.अत: सभी छुटे हुए  सरकारी कार्यालयों/भवनों के नामपट्ट में संताली भाषा के ओलचिकी लिपि में भी कार्यालय/भवन का नाम अंकित किया जाय। बहरहाल यह मुद्दा अब गरमाता जा रहा है और इसको लेकर ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन की चेतावनी दे रहें हैं। 
 
 
दुमका से कोयलांचल लाइव के लिए विजय तिवारी की रिपोर्ट