Date: 30/08/2025 Saturday
ABOUT US
ADVERTISE WITH US
Contact Us
Koylanchal Live
बड़ी खबरें
देश प्रदेश
राज्य
MUMBAI
महाराष्ट्र
राजस्थान
गुजरात
उत्तराखंड
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
ओडिशा
पंजाब
झारखण्ड
उत्तर प्रदेश
जम्मू कश्मीर
दिल्ली
आंध्र प्रदेश
बिहार
छत्तीसगढ़
MADHYA PRADESH
राजधानी
रांची
पटना
लखनऊ
राजनीति
अपराध जगत
स्पोर्ट्स
वर्ल्ड न्यूज़
बिज़नेस
इंटरटेनमेंट
कोयलांचल लाइव TV
फोटो गैलरी
तालिबान में महिलाओं पर अत्याचार, UN महासभा को सौंपी एक रिपोर्ट
8/7/2025 11:53:28 AM IST
70
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
अफगानिस्तान के तालिबान में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार को लेकर संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र मानवाधिकार जांचकर्ता रिचर्ड बेनेट ने चिंता व्यक्त की. बेनेट ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को सौंपी एक रिपोर्ट में बताया कि तालिबान शासको ने महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार करने के लिए कानूनी और न्यायिक व्यवस्था को हथियारबंद कर लिया है. उन्होंने कहा कि यह मानवता के खिलाफ अपराध के बराबर है।
रिचर्ड बेनेट ने बताया कि 2021 में सत्ता हथियाने के बाद, तालिबान ने 2004 के संविधान में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों को खत्म कर दिया. उन्होंने कहा कि इन कानूनों में बलात्कार, बाल विवाह और जबरन विवाह सहित महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे अपराध शामिल थे।
सभी न्यायाधीशों को किया बर्खास्त
बेनेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तालिबान ने पिछली अमेरिका समर्थित सरकार के सभी न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया, जिनमें लगभग 270 महिलाएं भी शामिल थीं. इन न्यायधीशों की जगह ऐसे लोगों को न्यायाधीश नियुक्त किया जो कट्टर इस्लामी विचारों को मानते थे. उन्हें कानून या न्याय की कोई समझ नहीं है. वह तालिबान द्वारा जारी किए गए आदेशों के आधार पर फैसले सुनाते हैं. उन्होंने कहा कि इसके अलावा तालिबान ने कानून प्रवर्तन और जांच एजेंसियों पर पूरा कंट्रोल कर लिया है और पिछली सरकार के लिए काम करने वाले सभी अफगान व्यक्तियों को उनके पद से हटा दिया है।
कक्षा 6 के बाद लड़कियां नहीं कर सकती पढ़ाई
बेनेट ने कहा कि जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, तब से महिलाओं और लड़कियों की स्थिति और भी दयनीय हो गई है और इसकी व्यापक रूप से भी काफी निंदा की गई. रिपोर्ट में बताया गया कि तालिबान नेताओं ने छठी कक्षा के बाद महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगा दी है और रोजगार पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. इतना ही नहीं महिलाओं को पार्क, जिम और हेयरड्रेसर सहित कई सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस नए कानून महिलाओं की आवाज और घर के बाहर बिना चेहरा ढके जाने पर भी प्रतिबंध है. बेनेट ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों पर अपने प्रतिबंधों के कारण तालिबान पश्चिम से अलग-थलग है और उसे केवल रूस ने ही मान्यता दी है।
शरिया कानून के तहत कर रहे हैं काम’
बेनेट ने बताया कि तालिबान अपने दृष्टिकोण का बचाव करने के लिए यह दावा करते हैं कि वे इस्लामी शरिया कानून लागू कर रहे हैं. लेकिन इस्लामी विद्वानों और अन्य लोगों का कहना है कि उनकी कानून अन्य मुस्लिम-बहुल देशों में अलग है और इस्लामी शिक्षाओं का पालन नहीं करती. उनका कहना है कि महिलाओं के कानूनी अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता है।
महिलाओं के पास नहीं है कोई अधिकार
बेनेट ने बताया कि तालिबान में महिलाओं के पास कोई भी अधिकार नहीं हैं. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि तालिबान में कोई महिला न्यायाधीश या वकील नहीं हैं. पुलिस और अन्य संस्थानों में भी कोई महिला अधिकारी नहीं है. इसका परिणाम यह होता है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव की व्यापक रूप से कोई रिपोर्टिंग ही नहीं हो पाती है. उन्होंने कहा कि तालिबान की यह अनिवार्यता है कि अगर कोई महिला शिकायत दर्ज करवाती है तो उसके साथ एक पुरुष होना अनिवार्य है, ये कई मायनों में बाधाएं पैदा करती है।
अदालत महिलाओं की शिकायत कर देती है रद्द
बेनेट ने बताया कि तालिबान की अदालतें अक्सर महिलाओं द्वारा की गई शिकायतों को खारिज कर देती है और तलाक, बच्चों की कस्टडी और लिंग आधारित हिंसा से संबंधित मामलों को स्वीकार करने में आनाकानी करती हैं. बेनेट ने कहा कि इन बाधाओं का सामना करते हुए, महिलाएं औपचारिक जिरगा और शूरा जैसी पारंपरिक तरीकों की ओर जा रही है, इसमें गांव या समुदायों में बुजुर्गों की परिषदें होती हैं, जो आपसी झगड़ों को सुलझाती हैं और कुछ महिलाएं धार्मिक नेता या परिवार के बुजुर्गों से मदद मांगती है. बेनेट का कहना है लेकिन ये सारा सिस्टम पुरुष-प्रधान हैं, तो स्वाभाविक है कि महिलाओं या लड़कियों के अधिकारों का हनन होगा और इंसाफ मिलने के चांस बहुत कम हो जाते है।
आईसीजे में लाने का किया अनुरोध
बेनेट ने अपील करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच न्याय दिलाने की बड़ी उम्मीद है. उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने तालिबान के दो वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ महिलाओं के साथ लैंगिंग आधार पर उत्पीड़न करने के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आग्रह किया. उन्होंने सभी देशों अपील करते हुए यह भी कहा कि अफगानिस्तान को सबसे बड़ी अदालत आईसीजे में ले जाने में समर्थन करें. उन्होंने कहा कि तालिबान ने महिलाओं के खिलाफ भेदभाव खत्म करने वाले अंतर्राष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन किया है।
कोयलांचल लाइव डेस्क
Disclaimer:
Tags:
0 comments. Be the first to comment.
सम्बंधित खबरें
#
जेलेंस्की ने स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया,कहा...
#
बांग्लादेश में बच्चियों के लिए दर्दनाक गुजर रहा 2025,यौन शोषण के मामले 75 प्रतिशत बढ़े
#
लेबनान में अमेरिकी की कोशिश नाकाम,हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करने से सेना का इनकार
#
परमाणु हथियारों का भंडार तेजी से बढ़ाएंगे,किम जोंग ने अपने सैनिकों को क्यों दिया ये निर्देश?
#
जैसी करनी वैसी भरनी, आतंकियों का आतंक पकिस्तान में, ट्रेन को बम से उड़ाया (सांकेतिक फोटो)
ट्रेंडिंग न्यूज़
#
सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा की बैठक, आंदोलन की रणनीति तय
#
वेस्टइंडीज ने पाकिस्तान को हराया, तीन-मैच की सीरीज को 1-1 से किया बराबर
#
प्रशंसा शर्मा बॉलीवुड में बना रही हैं अलग पहचान
#
जलापूर्ति योजना फेज-2 को लेकर विधानसभा पूर्णिमा ने की विभागीय बैठक
#
वित्त मंत्री ने संशोधित आयकर विधेयक लोकसभा में किया पेश, आयकर अधिनियम, 1961 की लेगा जगह