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Hartalika Teej 2025:मेहंदी के रंग और खुशबू से सजती सुहागिनों की सोलह श्रृंगार

8/26/2025 10:46:50 AM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Edited By -Saba Afrin
 
 
Hartalika Teej 2025: भारत में तीज-त्योहारों का मौसम आते ही हर जगह रंग-बिरंगी रौनक दिखाई देने लगती है. खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए तीज बेहद खास पर्व माना जाता है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं. सोलह श्रृंगार में से एक श्रृंगार है मेहंदी. तीज पर हाथ-पांव में मेहंदी रचाने की परंपरा सदियों पुरानी है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं भी हैं और वैज्ञानिक कारण भी। 
 
तीज-त्योहारों पर मेहंदी रचाना केवल सजने-संवरने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और वैज्ञानिक कारणों का संगम है. मेहंदी की खुशबू और रंग तीज के उत्सव को और भी खास बना देते हैं. यही वजह है कि आज भी तीज पर मेहंदी रचाए बिना सुहागिन महिलाओं का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। 
 
धार्मिक महत्व
मेंहदी का तीज पर विशेष महत्व है. इसे सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जिस तरह माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया, उसी तरह तीज पर मेहंदी रचाने वाली स्त्रियों को भी अखंड सौभाग्य और लंबा वैवाहिक जीवन मिलता है. मेहंदी का लालिमा भरा रंग मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि मेहंदी न केवल तीज पर बल्कि शादी, करवा चौथ और अन्य शुभ अवसरों पर भी लगाई जाती है. कहा जाता है कि तीज पर मेहंदी लगाने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन सुखी रहता है। 
 
लोक मान्यताएं
भारतीय समाज में मेहंदी को लेकर कई लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि जिस महिला की मेहंदी जितनी गहरी रचती है, उसे उतना ही पति और ससुराल का प्यार मिलता है. कई जगह यह भी मान्यता है कि तीज और करवा चौथ जैसे व्रत तब तक अधूरे हैं जब तक मेहंदी न लगाई जाए. कुछ स्थानों पर यह परंपरा भी है कि ससुराल से आई महिलाएं अपनी बहू-बेटियों को तीज पर मेहंदी भेजती हैं. इसे सौभाग्य का आशीर्वाद और रिश्तों की मिठास का प्रतीक माना जाता है.
 
वैज्ञानिक कारण
मेहंदी का महत्व सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं.
 
.प्राकृतिक ठंडक मेहंदी का सबसे बड़ा गुण है शरीर को ठंडक पहुंचाना. तीज अक्सर सावन-भाद्रपद के उमस भरे मौसम में आती है. ऐसे में मेहंदी शरीर की गर्मी कम करती है और नर्व्स को आराम देती है.
 
.तनाव कम करना हथेली और तलवों पर मेहंदी लगाने से नसों को सुकून मिलता है. इससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है.
 
.एंटीसेप्टिक गुण मेहंदी में औषधीय गुण होते हैं. यह हाथ-पांव को संक्रमण और बैक्टीरिया से बचाती है.
 
.स्वस्थ रंग मेहंदी का प्राकृतिक रंग न केवल सुंदर दिखता है बल्कि यह केमिकल फ्री होता है, इसलिए यह त्वचा के लिए भी सुरक्षित है.
 
मेहंदी और सोलह श्रृंगार
भारतीय परंपरा में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है. इसे स्त्रियों के सौंदर्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है. मेहंदी को इन सोलह श्रृंगारों में सबसे पवित्र और शुभ श्रृंगारों में गिना जाता है. तीज पर मेहंदी लगाना सिर्फ श्रृंगार नहीं, बल्कि यह पूजा और आस्था का एक अहम हिस्सा भी है। 
 
कोयलांचल लाइव डेस्क