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भारत ने दुनिया को बेच डाला 5.25 लाख करोड़ का तेल,देखते रह गए अमेरिका और यूरोप

8/25/2025 11:20:43 AM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Edited By -Saba Afrin
 
 
Business :दो दिन बाद भारत पर अमेरिका का 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लागू हो जाएगा. ये टैरिफ रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाया गया है. इसका मतलब है कि अब भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी होगा. ये टैरिफ यूं ही नहीं लगाया गया है. अमेरिका और ईयू का ये कहना है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर दुनिया को बेच रहा है और रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद कर रहा है. ट्रंप और उसके प्रशासन ने तो भारत पर ये भी आरोप लगाया है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को फ्यूल देने का काम कर रहा है। 
 
खैर आज बात ना तो अमेरिका के आरोपों की होगी. ना ही यूरोप के भारत पर उठाए सवालों की. आज तो बात सिर्फ रूसी तेल से भारत की इकोनॉमी को मिलने वाली मदद की होगी. जब भारत से रूस से तेल खरीदना शुरू किया था तो भारत के ऑयल बास्केट में रूसी ऑयल की हिस्सेदारी 2 फीसदी की भी नहीं थी. कोविड का दौर था. ग्लोबल इकोनॉमी क्राइसिस के दौर से गुजर रही थी. भारत का एक्सपोर्ट काफी कम हो गया था. कमाई के रास्ते काफी सीमित हो चुके थे. ऐसे में रूसी तेल ने भारत की इकोनॉमी को आसरा दिया। 
भारत ने रूसी तेल को सस्ते दामों में खरीदकर उसे रिफाइंड किया और यूरोप के अलावा अमेरिका और दुनिया के बाकी हिस्सों में एक्सपोर्ट किया. वित्त वर्ष 2024 में भारत का ये रिफाइंड ऑयल एक्सपोर्ट 80 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया था. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर भारत की इकोनॉमी को चलाने में रूसी तेल का कितना अहम योगदान रहा है. आइए आपको भी आंकड़ों के सहारे रूसी तेल से भारत की कमाई का गणित समझाने की कोशिश करते हैं। 
 
पहले बात इंपोर्ट की
भारत दुनिया को रिफाइंड ऑयल एक्सपोर्ट करने से पहले कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. मौजूदा समय में भारत के लिए कच्चे तेल के सप्लायर्स की संख्या 50 से ज्यादा हो चुकी है. जिसमें भारत का सबसे बड़ा सप्लायर कोई और नहीं बल्कि रूस है. इंडियन ऑयल बास्केट में रूसी तेल की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है. आंकड़ों से समझाने की कोशिश करें तो केप्लर की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अगस्त के महीने में हर रोज 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा है. जोकि जुलाई के 1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज्यादा है. वो भी ऐसे समय पर जब अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.
 
इस इजाफे का प्रमुख कारण इराक और सऊदी अरब से आयात कम होना है. रिपोर्ट के अनुसार भारत हर रोल 5.2 मिलियन कच्चा तेल रोज इंपोर्ट करता है. जिसमें अगस्त के पहले पखवाड़े में रूस की हिस्सेदारी 38 फीसदी देखने को मिली. इराक से भारत को सप्लाई कम हुई है. जहां जुलाई में ये आंकड़ा 907,000 बैरल प्रतिदिन था, जोकि अगस्त में कम होकर 730,000 बैरल प्रतिदिन हो गई. वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब की सप्लाई जुलाई में 700,000 बैरल प्रतिदिन देखने को मिली थी, जो अगस्त में कम होकर 526,000 बैरल प्रतिदिन हो गई. अमेरिका ने भारत को 264,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल इंपोर्ट किया और 5वां सबसे बड़ा सप्लायर बना.
 
रिफाइंड ऑयल से कितनी कमाई?
वहीं दूसरी ओर भारत ने अब दुनिया को कच्चा तेल रिफाइंड कर बेचना शुरू किया और अरबों डॉलर की कमाई की. यहीं से अमेरिका और यूरोप की परेशानी शुरू होती है. कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टी के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने रिफाइंड ऑयल दुनिया को बेचकर 60.07 बिलियन डॉलर यानी 5.25 लाख करोड़ रुपए की कमाई की है. वैसे ये कमाई वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों से काफी कम है.
 
रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2023-24 से काफी है. डाटा के अनुसार उक्त वित्त वर्ष में भारत ने रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेचकर 84.2 बिलियन डॉलर यानी 7.37 लाख करोड़ रुपए की कमाई की थी. इसका मतलब है कि भारत को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट से वित्त वर्ष 2025 में 2.12 लाख करोड़ रुपए की कम कमाई हुई है. जिसका प्रमुख कारण इस दौरान ग्लोबल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट है। 
 
कौन से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेचकर भारत ने कितनी की कमाई
इतनी होती है कमाई
डॉलर बिजनेस की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने कई पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को रिफाइंड कर दुनिया को बेचा है. जिसमें हाई-स्पीड डीजल सबसे ऊपर है. आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में भारत इसका 17.38 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया. जबकि भारत ने मोटर स्पिरिट यानी पेट्रोल का एक्सपोर्ट 8.13 बिलियन डॉलर किया था. एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी जेट फ्यूल विदेशों में बेचकर 5.33 बिलियन डॉलर की कमाई की. वहीं फ्यूल ऑयल बेचकर भारत ने अपनी कमाई में 1.38 बिलियन डॉलर का इजाफा किया. पेट्रोलियम प्रोडक्ट नेफ्था को बेचकर भारत के खजाने में 196.29 मिलियन डॉलर आए. जबकि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी बेचकर 37.51 मिलियन डॉलर की कमाई की. भारत ने दुनिया को केरोसिन भी बेचा और 2 मिलियन डॉलर कमाए। 
 
कोयलांचल लाइव डेस्क