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गया जी का डेढ़ सौ वर्ष पुराना तिलकुट देश दुनिया में हुआ मशहूर 
 

1/13/2026 2:15:47 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
गया जी: धार्मिक आध्यात्मिक व पौराणिक नगरी गया जी का डेढ़ सौ वर्ष पुराना तिलकुट देश दुनिया में मशहूर है।गया जी की पहचान बन चुकी तिलकुट की सोंधी महक और इसकी मिठास देश सहित विदेशों में भी वर्षों से इसकी फ्लेवर व मिठास बरकरार है। जाड़े में तिलकुट की मांग बढ़ जाती है ।14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर पर दही चुड़ा के साथ तिलकुट खाने का पूरे देश में पौराणिक सांस्कृतिक व सनातनी परंपरा रही है। इस परंपरा का निर्वहन विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के निवासी आज भी कर रहे है। शहर के रमण टिकारी रोड के साथ डांगरा टेकारी तिलकुट का मुख्य बाजार है। जिले में छोटी बड़ी करीब 400 तिलकुट की दुकान संचालित है। तिलकुट बनाने में चीनी के अलावे तिल की मिश्रण से बनाई जाती है चासनी तैयार कर फेंटा जाता है और फिर लोई बनाकर तिल का मिश्रण कर कुटाई की जाती है 1 किलो खस्ता तिलकुट बनाने में करीब आधा किलो तिल का उपयोग किया जाता है । तिलकुट कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि गया जी के वंशी साहू व गोपी साहू करीब डेढ़ सौ साल पहले अपने घर से शुरुआत की थी और गुड़ से बनने वाली तिलकुट औषधि मिठाई भी है तिल और गुड़ का तासीर गर्म है जो जाड़े में शरीर के लिए लाभदायक है। और कब्ज की दूरी दूर हो जाता है पेट साफ रहता है इस कारण इस कारोबार के और भी पंख लग जाते हैं यह भी एक कारण है कि देश विदेश में लोग ऑनलाइन ऑर्डर कर बुकिंग करवाते हैं देश दुनिया में तिलकुट का प्रचलन काफी बढ़ जाने से मकर संक्रांति पर इसकी खपत काफी बढ़ जाती है।इस वर्ष करीब 200 टन तिलकुट की खरीद बिक्री तय मानी जा रही है और लगभग 8 से 10 करोड रुपए तक की तिलकुट के कारोबार की उम्मीद जताई जा रही है। कारोबार से जुड़े लालजी प्रसाद बताते हैं कि गया जी का तिलकुट उद्योग को अब तक भले ही जीटैग नहीं मिला है। लेकिन इसकी सोंधी महक देश दुनिया में लगातार पहुंच रही है।
 
गया जी से कोयलांचल लाइव के लिए मनोज कुमार की रिपोर्ट