Date: 15/05/2026 Friday ABOUT US ADVERTISE WITH US Contact Us

एकदिवसीय सेमिनार को लेकर तृतीय बैठक आयोजित, तैयारियों पर विभाग में व्यापक मंथन

5/15/2026 5:36:33 PM IST

25
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Aara  :वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग में आगामी 18 मई को आयोजित होने वाले एकदिवसीय सेमिनार की तैयारियों को लेकर विभागीय गतिविधियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित तृतीय बैठक में शोधार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में सेमिनार को अकादमिक रूप से समृद्ध, व्यवस्थागत रूप से सुव्यवस्थित तथा वैचारिक दृष्टि से प्रभावशाली बनाने को लेकर व्यापक चर्चा की गई। इस एकदिवसीय सेमिनार का विषय “बहुसांस्कृतिक समाज में सामाजिक परिवर्तन का अभिशासन” रखा गया है, जिसे वर्तमान सामाजिक और प्रशासनिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। बैठक के दौरान विभागीय शिक्षकों ने कहा कि आज का समाज तेजी से बदल रहा है। वैश्वीकरण, तकनीकी क्रांति, डिजिटल संचार, आर्थिक उदारीकरण और सामाजिक गतिशीलता ने समाज को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया है। विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं, जातीय पहचानें और जीवनशैलियां एक-दूसरे के संपर्क में आ रही हैं। ऐसे में सामाजिक परिवर्तन को सही दिशा देने और समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रभावी अभिशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। बैठक की शुरुआत विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र नहीं होता, बल्कि वह विचारों के निर्माण, ज्ञान के विकास और सामाजिक चेतना के विस्तार का महत्वपूर्ण मंच होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपनी बौद्धिक क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज जिन जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें सामाजिक असमानता, सांस्कृतिक टकराव, प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समावेशी विकास जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे मुद्दों पर अकादमिक विमर्श आवश्यक है, ताकि नीतिगत स्तर पर बेहतर सोच विकसित की जा सके। डॉ. रमेश सिंह ने शोधार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने शोधपत्रों में केवल सैद्धांतिक पक्षों तक सीमित न रहें, बल्कि समकालीन सामाजिक परिस्थितियों, प्रशासनिक चुनौतियों और व्यवहारिक अनुभवों को भी शामिल करें। उन्होंने कहा कि एक अच्छा शोधपत्र वही होता है, जो समाज और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करे तथा समस्याओं के समाधान की दिशा भी प्रस्तुत करे। उन्होंने आगे कहा कि लोक प्रशासन केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के हर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक निर्णयों का सीधा प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पड़ता है। इसलिए प्रशासन को संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बैठक में प्रोफेसर डॉ. उमेश कुमार ने सेमिनार के मुख्य विषय “बहुसांस्कृतिक समाज” की अवधारणा पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में बहुसांस्कृतिकता केवल एक सामाजिक वास्तविकता नहीं, बल्कि हमारी पहचान है। यहां विभिन्न धर्म, भाषाएं, परंपराएं, जातियां और संस्कृतियां सदियों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। यही विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति भी है और चुनौती भी। उन्होंने कहा कि जब समाज में विविधता बढ़ती है, तब प्रशासनिक चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। विभिन्न समुदायों की अपेक्षाएं, अधिकार और आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं। ऐसे में शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है। डॉ. उमेश कुमार ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया है। समय के साथ समाज की सोच, व्यवहार, संस्थाएं और मूल्य बदलते रहते हैं। तकनीक और संचार क्रांति ने इस परिवर्तन की गति को और अधिक तेज कर दिया है। आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म समाज की सोच को प्रभावित कर रहे हैं। युवा पीढ़ी तेजी से नए विचारों को स्वीकार कर रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह परिवर्तन को सकारात्मक दिशा दे और समाज में संतुलन बनाए रखे।
उन्होंने शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने शोधपत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, डिजिटल गवर्नेंस, महिला सशक्तिकरण, अल्पसंख्यक अधिकार, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे विषयों को भी शामिल करें। इससे सेमिनार अधिक व्यापक और उपयोगी बन सकेगा। वही सहायक प्रोफेसर डॉ. आमीर महमूद ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सेमिनार में विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शोधार्थी अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा विशेषज्ञ व्याख्यान, संवाद सत्र, समूह चर्चा और प्रश्नोत्तर कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रतिभागियों के बीच संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का मंच होगा। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देने तक सीमित नहीं रह गई है। अब विश्वविद्यालयों को समाज की समस्याओं पर शोध करना और समाधान प्रस्तुत करना भी आवश्यक हो गया है। बैठक के दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया। इनमें स्वागत समिति, मंच संचालन समिति, भोजन समिति, जलपान समिति, डेकोरेशन समिति, पंजीकरण समिति, तकनीकी समिति, मीडिया एवं प्रचार समिति तथा वीडियो एवं डॉक्यूमेंटेशन समिति शामिल हैं। स्वागत समिति को अतिथियों के स्वागत एवं आवभगत की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति विश्वविद्यालय पहुंचने वाले शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों का समन्वय करेगी। भोजन एवं जलपान समिति प्रतिभागियों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। तकनीकी समिति को प्रोजेक्टर, साउंड सिस्टम, माइक्रोफोन, प्रस्तुतीकरण व्यवस्था तथा डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं वीडियो एवं डॉक्यूमेंटेशन समिति पूरे आयोजन की रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और अभिलेखीकरण का कार्य करेगी। मीडिया एवं प्रचार समिति को सेमिनार की जानकारी व्यापक स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति सोशल मीडिया, प्रेस विज्ञप्ति और विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों से कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करेगी।डॉ. आमीर महमूद ने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता टीमवर्क पर निर्भर करती है। यदि सभी लोग समन्वय और अनुशासन के साथ कार्य करें, तो सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने सभी शोधार्थियों से कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें और समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करें। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सेमिनार के शोधपत्रों को संकलित कर पुस्तक या शोध जर्नल के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। इससे सेमिनार में प्रस्तुत विचारों और निष्कर्षों का लाभ व्यापक स्तर पर शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिल सकेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश सिंह ने कहा कि शोध की गुणवत्ता बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है। इसलिए सभी शोधपत्रों की समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। समीक्षा के बाद ही शोधपत्रों को प्रस्तुति के लिए अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे सेमिनार की अकादमिक गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। बैठक में उपस्थित शोधार्थियों ने भी अपने विचार रखे। कई शोधार्थियों ने सुझाव दिया कि सेमिनार में युवाओं की भूमिका, डिजिटल समाज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रामीण प्रशासन, सामाजिक मीडिया का प्रभाव तथा बदलती प्रशासनिक संरचना जैसे विषयों को भी शामिल किया जाए। शोधार्थियों ने यह भी कहा कि ऐसे सेमिनार उन्हें शोध की नई दिशा प्रदान करते हैं। इससे न केवल उनकी प्रस्तुतीकरण क्षमता विकसित होती है, बल्कि विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से सीखने का अवसर भी मिलता है। बैठक के दौरान यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि यह सेमिनार केवल विभागीय आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह सामाजिक और प्रशासनिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। वर्तमान समय में जब समाज तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब प्रशासन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। बहुसांस्कृतिक समाज में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखना है। यदि शासन व्यवस्था संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह हो, तो सामाजिक समरसता को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ यह सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. रमेश कुमार सहित पीएचडी बैच PAT-21, PAT-23 एवं PAT-24 के अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे। इनमें धर्मराज मिश्र रॉकी सिंह, अमरजीत कुमार, रविरंजन प्रसाद, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, विशाल कुमार, सुनील कुमार, रोशन, राज, अनिरुद्ध सिंह, अंशुराज सुमन, सौरव, सुमन श्रीवास्तव, अमृता भारती, बबलू कुमार, संजय कुमार सिंह, रविरंजन कुमार चौबे, अमित यादव, अभिनव शशांक मिश्रा, आशुतोष, गौरव, संदीप कुमार, संजय कुमार गुप्ता, विष्णु सिंह एवं इन्दु कुमारी सहित कई शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट