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पारंपरिक खेती से कम मुनाफा तो सफेद चंदन का रुख, 12 साल बाद करोड़ों की कमाई की उम्मीद

8/25/2026 5:06:32 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team

गया: पारंपरिक खेती में कम मुनाफे के बीच गया के एक किसान ने कमाई का नया रास्ता तलाशने की कोशिश की है। टिकारी प्रखंड के उर गांव निवासी किसान राजू कुमार ने जीवन बीमा की तर्ज पर सफेद चंदन की खेती शुरू की है। किसान का कहना है कि जिस तरह जीवन बीमा में लंबे समय के बाद मैच्योरिटी का लाभ मिलता है, उसी सोच के साथ उन्होंने चंदन के पौधे लगाए हैं। हालांकि, भविष्य की कमाई और बाजार मूल्य को लेकर उनके अनुमान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यूट्यूब से मिला आइडिया, कई राज्यों में जाकर जुटाई जानकारी

राजू कुमार के अनुसार, सफेद चंदन की खेती का विचार उन्हें यूट्यूब पर इससे जुड़े वीडियो देखने के दौरान आया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और धनबाद समेत कई स्थानों का दौरा किया और चंदन की खेती से जुड़ी जानकारी जुटाई।

उन्होंने बताया कि चंदन की खेती के लिए गया की जलवायु उन्हें उपयुक्त लगी। मिट्टी का पीएच मान भी जांच कराया गया, जो उनके अनुसार करीब 6.5 से 7.5 के बीच पाया गया।

100 पौधे लाए, अब 50 पेड़ तैयार

राजू कुमार ने करीब तीन-चार साल पहले सफेद चंदन की खेती शुरू की थी। उन्होंने शुरुआत में करीब 100 पौधे मंगाए थे। इनमें से कुछ पौधे खराब हो गए, जबकि करीब 60 पौधों को खेत में लगाया गया। इनमें भी लगभग 10 पौधे विकसित नहीं हो सके। फिलहाल करीब 50 पेड़ अच्छी स्थिति में हैं।

किसान के अनुसार, कई पेड़ अब 7 से 8 फीट या उससे अधिक ऊंचे हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती वर्षों में पौधों की देखभाल, सिंचाई और दीमक से बचाव पर ध्यान देना पड़ता है।

50 पेड़ों से 2 करोड़ कमाई की उम्मीद

राजू कुमार का दावा है कि एक परिपक्व चंदन के पेड़ से करीब 20 किलो तक लकड़ी प्राप्त हो सकती है। उन्होंने वर्तमान बाजार भाव करीब 20 हजार रुपये प्रति किलो होने का अनुमान लगाया है। इसी गणना के आधार पर वे भविष्य में एक पेड़ से करीब 4 लाख रुपये और 50 पेड़ों से 2 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी की उम्मीद जता रहे हैं।

हालांकि, वास्तविक आय पेड़ की गुणवत्ता, उम्र, लकड़ी की मात्रा, बाजार भाव और सरकारी नियमों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगी। मौजूदा छोटे पेड़ों की लकड़ी का मूल्यांकन भी परिपक्व चंदन की तरह नहीं किया जा सकता।

पारंपरिक खेती के साथ चंदन लगाने की सलाह

किसान राजू कुमार का कहना है कि धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों से अब अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान पारंपरिक खेती के साथ लंबे समय वाली फसलों पर भी विचार कर सकते हैं। उनका सुझाव है कि चंदन के पेड़ों के बीच या आसपास सब्जियों जैसी फसलों की खेती कर अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि सफेद चंदन की खेती में सहायक पौधों की भी भूमिका होती है। चंदन के पौधे अपने आसपास मौजूद सहायक पौधों से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।

बिक्री के लिए नियमों की जानकारी जरूरी

राजू कुमार के अनुसार, सफेद चंदन की लकड़ी का इस्तेमाल इत्र, चंदन तेल, आयुर्वेदिक उत्पादों और धार्मिक कार्यों में किया जाता है। बाजार में इसकी मांग भी बताई जाती है। हालांकि, चंदन की कटाई, परिवहन और बिक्री को लेकर सरकारी नियम लागू हो सकते हैं, इसलिए किसानों को खेती शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से नियमों और आवश्यक अनुमति की जानकारी लेना जरूरी है। राजू कुमार का कहना है कि उन्होंने करीब 50 हजार रुपये की शुरुआती लागत से यह प्रयोग शुरू किया है। अब वे अपनी चंदन की खेती को अगले कई वर्षों तक विकसित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर पेड़ इसी तरह बढ़ते रहे और भविष्य में बाजार भाव अनुकूल रहा, तो यह खेती उनके लिए बड़ी आय का जरिया बन सकती है।

 

 

 गया से कोयलांचल लाइव के लिए मनोज कुमार की रिपोर्ट