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सर्वोच्च न्यायालय ने राहुल की सजा पर लगाई रोक, 133 दिन बाद मिली राहत…सांसदी बहाल होगी, घर भी मिलेगा; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सजा का असर राहुल ही नहीं, वोटर्स पर भी पड़ा

05-08-2023 20:30:01 IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
EDITED BY:- ARCHANA SHARMA 
नई दिल्ली: राहुल गांधी की सांसदी जाने के 133 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर ही रोक लगा दी, जिसकी वजह से उनकी सांसदी गई थी। मोदी सरनेम से जुड़े मानहानि केस में राहुल को निचली अदालतों ने 2 साल की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जब तक राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक दोषसिद्धि पर रोक रहेगी।’ सुनवाई की नई तारीख अभी नहीं बताई है।
इसके साथ ही कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले पर तीन सबसे जरूरी बातें कहीं…
 
1. हम जानना चाहते हैं कि ट्रायल कोर्ट ने अधिकतम सजा क्यों दी? जज को फैसले में ये बात बतानी चाहिए थी। अगर जज ने 1 साल 11 महीने की सजा दी होती तो राहुल गांधी को डिसक्वालिफाई नहीं किया जाता।
2. अधिकतम सजा के चलते एक लोकसभा सीट बिना सांसद के रह जाएगी। यह सिर्फ एक व्यक्ति के अधिकार का ही मामला नहीं है, ये उस सीट के वोटर्स के अधिकार से भी जुड़ा मसला है।
3. इस बात में कोई शक नहीं कि भाषण में जो भी कहा गया, वह अच्छा नहीं था। नेताओं को जनता के बीच बोलते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। यह राहुल गांधी का कर्तव्य बनता है कि इसका ध्यान रखें।
अदालत के इस फैसले से राहुल के पक्ष में तीन सबसे जरूरी बातें होंगी…
राहुल गांधी की सांसदी फिर से बहाल होगी और वो मौजूदा सत्र में शामिल हो सकेंगे।
अगले साल राहुल चाहें तो चुनाव लड़ सकते हैं, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट का आखिरी फैसला उनके खिलाफ ना हो।
राहुल को बतौर सांसद मिलने वाला सरकारी घर फिर से मिल जाएगा।
3 अप्रैल को राहुल ने सूरत की सेशन कोर्ट में लोअर कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुनवाई की याचिका दाखिल की थी। तस्वीर उसी दिन की है।
 
3 अप्रैल को राहुल ने सूरत की सेशन कोर्ट में लोअर कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुनवाई की याचिका दाखिल की थी। तस्वीर उसी दिन की है।
 
सुप्रीम कोर्ट में 15 दिन में 3 सुनवाई: राहुल ने 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई 21 जुलाई को हुई। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और राहुल से जवाब दाखिल करने को कहा। इसके बाद 2 अगस्त को फिर बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद 4 अगस्त तक फैसला सुरक्षित रख लिया।
बेंच में 3 जज: जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस संजय कुमार। 21 जुलाई को पहली सुनवाई में जस्टिस गवई ने कहा कि उनके पिता कांग्रेस से जुड़े हुए थे और भाई भी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके सुनवाई करने से किसी पक्ष को कोई आपत्ति तो नहीं है। इस पर दोनों पक्षों ने कहा कि उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है।
 
कोयलांचल लाइव डेस्क