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170 साल पहले 1855 - 56 में दामिने- कोह की याद ताजी कर देती है हूल दिवस : डॉ काशीनाथ
6/30/2025 3:46:48 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Sindri :
आज से 170 साल पहले 1855 - 56 में दामिने- कोह जिसे अब संताल परगना कहा जाता है, वहां संताल हूल की ऐतिहासिक घटना हुई थी। यह कहना है भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. काशीनाथ चटर्जी का ,वह सिंदरी स्थित आरएमकेफोर कॉलोनी में हूल दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्यवक्ता सम्बोधित कर रहें थें। यह ज्ञान विज्ञान समिति व अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हो रही रही थी। संगोष्ठी की अध्यक्षता महिला समिति की अध्यक्ष रानी मिश्रा व संचालन ज्ञान विज्ञान समिति के जिला सचिव भोला नाथ राम ने की । इस हूल के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ - साथ इस इलाके के जमींदारों और महाजनों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका गया था ।जिसका नेतृत्व सिदो - कान्हू, चांद - भैरव और फूलो - झानो ने की थी । यह यहां के किसानों का विद्रोह था जिसने 1857 में शुरू हुए देश को गुलामी से मुक्त करने की आजादी के लड़ाई की पृष्ठभूमि तय कर दी थी। यह हूल संताल आदिवासियों और अन्य गरीबों की सामुदायिक और सामुहिक स्वामित्व वाली जमीन जिसे जमींदारों व महाजनों द्वारा जबरन कब्जा किए जाने के खिलाफ शुरू हुआ और इस क्षेत्र के तमाम गरीब भी इस विद्रोह में शामिल हो गए। इस विद्रोह को दबाने और इस इलाके के शोषकों की मदद के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी फौज भेज दी ।जिसका जोरदार प्रतिरोध हुआ और 60 हजार संताल विद्रोहियों ने अपने परंपरागत हथियारों के साथ इस बंदुकधारी फौज का बहादुरी से मुकाबला करते हुए इन्हें खदेड़ दिया। किसान सभा के वरिष्ठ नेता संतोष कुमार महतो ने कहा कि महान चिंतक और वैज्ञानिक समाजवाद के प्रणेता कार्ल मार्क्स ने संताल हूल को भारत का पहला जन विद्रोह बताया। इस लड़ाई में सिदो - कान्हू समेत 10 हजार से ज्यादा लोग शहीद हुए लेकिन इस विद्रोह (हूल) ने स्वतंत्रता संग्राम की भूमिका लिख दी। क्योंकि यह हूल जिसका नेतृत्व सिदो - कान्हू जैसे बीर योद्धा कर रहे थे ने इस इलाके के सभी गरीबों को एकजुट करने का काम किया। संगोष्ठी को ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य उपाध्यक्ष हेमंत कुमार जयसवाल, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी रवि सिंह ,महिला समिति की जिला अध्यक्ष उपासी महताइन, मिठू दास, सविता देवी, रंजू प्रसाद, ठेका मजदूर यूनियन के महासचिव गौतम प्रसाद, ठेका मजदूर यूनियन सचिव सूर्य कुमार सिंह, सुबल चंद्र दास, ज्ञान विज्ञान समिति के मधुमिता मिस्त्री, राजू बाउरी ने संबोधित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मधेश्वर नाथ भगत , नरेंद्र नाथ दास, शिबू राय, प्रमोद सिंहा , शिवेंद्र पांडे, ज्योति राय की सराहनीय भूमिका रही ।
झरिया से कोयलांचल लाइव के लिए शिवम पांडेय की रिपोर्ट
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