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1 दशक 12 साल कितना बदला देश का हाल: चंदन चौरसिया
6/9/2026 1:48:14 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Patna
: भारतीय लोकतंत्र में कुछ तारीखें इतिहास बन जाती हैं और कुछ नेतृत्व अपने कामों से समय की सीमाओं को पार कर जाते हैं। 10 जून 2026 ऐसी ही एक तारीख बन गई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4399 दिन तक एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि लगातार तीन बार जनता का विश्वास जीतने, बदलते भारत की आकांक्षाओं और लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। 2014 से 2026 तक का यह सफर भारत के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक स्वरूप में आए बड़े बदलावों की कहानी भी है। आज का भारत डिजिटल भुगतान में दुनिया का नेतृत्व करता है, अंतरिक्ष में नए कीर्तिमान स्थापित करता है, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ता है और वैश्विक मंचों पर पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरा है।
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नेहरू से मोदी तक: दो दौर, दो चुनौतियां
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी के बाद एक नए राष्ट्र की नींव रखी। उनके नेतृत्व में बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, वैज्ञानिक संस्थान, आईआईटी, भाखड़ा नांगल जैसी परियोजनाएं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना हुई। उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन और आधुनिक भारत की बुनियादी संरचना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में सत्ता में आए जब भारत वैश्वीकरण, तकनीकी परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी नई चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसलिए दोनों नेताओं के कार्यकाल अलग-अलग परिस्थितियों में रहे, लेकिन दोनों ने अपने-अपने दौर में देश की दिशा तय करने का प्रयास किया।
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डिजिटल इंडिया: जेब में बैंक, मोबाइल में बाजार
2014 के बाद भारत में डिजिटल क्रांति ने आम आदमी की जिंदगी बदल दी। यूपीआई ने चाय वाले से लेकर बड़े कारोबारी तक सभी को कैशलेस भुगतान की सुविधा दी। आज हर महीने 23 अरब से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था बनाते हैं।डिजिटल इंडिया अभियान ने सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को नई गति दी। गांवों तक इंटरनेट पहुंचा और तकनीक आम नागरिक की रोजमर्रा की जरूरत बन गई।
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जन-धन से जनकल्याण तक
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवार पहली बार बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने लगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका कम हुई।आज गरीब महिला, किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं।
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सड़क, रेल और आसमान तक पहुंच
पिछले 12 वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ। रेलवे का व्यापक विद्युतीकरण किया गया और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों ने यात्रा का अनुभव बदला। उड़ान योजना के जरिए छोटे शहरों को हवाई संपर्क मिला। इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
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अनुच्छेद 370: दशकों पुराना फैसला बदला
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाना मोदी सरकार का सबसे चर्चित और ऐतिहासिक राजनीतिक निर्णय माना गया। सरकार का दावा है कि इससे जम्मू-कश्मीर में विकास योजनाओं का विस्तार हुआ और केंद्रीय कानूनों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा।
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स्वास्थ्य सुरक्षा का नया मॉडल
आयुष्मान भारत योजना ने गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिया। डिजिटल हेल्थ मिशन और ई-संजीवनी जैसी सेवाओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं को तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया और करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई। वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से कई देशों को भी सहायता दी गई।
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हर घर जल, हर घर छत
जल जीवन मिशन के माध्यम से करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का अभियान शुरू हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को पक्के घर मिले, जिससे जीवन स्तर में सुधार का दावा किया गया।
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आत्मनिर्भर भारत की नई सोच
मेक इन इंडिया और पीएलआई योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया। भारत आज दुनिया के प्रमुख मोबाइल निर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है।आत्मनिर्भर भारत अभियान ने घरेलू उद्योगों और स्थानीय उत्पादन को नई पहचान देने का प्रयास किया।
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रक्षा नीति में बदला नजरिया
सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, आईएनएस विक्रांत, तेजस विमान और ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात जैसे कदमों ने भारत की रक्षा नीति में आत्मविश्वास का नया संदेश दिया।रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि और स्वदेशी निर्माण पर जोर ने भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में नई संभावनाएं खोली हैं।
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स्वच्छता और महिला सशक्तीकरण
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालयों का निर्माण हुआ। उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए, जिससे पारंपरिक ईंधन के धुएं से राहत मिलने का दावा किया गया।इन योजनाओं ने ग्रामीण जीवन में स्वच्छता और महिलाओं के सम्मान को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया।
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अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला पहला देश बनाया। आदित्य-एल1 मिशन ने सूर्य अध्ययन में भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया।स्पेस सेक्टर में निजी भागीदारी बढ़ने से सैकड़ों स्टार्टअप नए अवसरों के साथ सामने आए हैं।
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जीएसटी: एक देश, एक टैक्स
2017 में लागू जीएसटी ने देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत किया। सरकार का दावा है कि इससे व्यापार आसान हुआ, टैक्स संग्रह बढ़ा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली।
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विदेश नीति का नया आत्मविश्वास
पिछले 12 वर्षों में भारतीय विदेश नीति अधिक सक्रिय और नागरिक-केंद्रित दिखाई दी। संकट के समय यूक्रेन, सूडान, अफगानिस्तान और इजराइल से भारतीयों की सुरक्षित वापसी ने सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को प्रदर्शित किया।
पासपोर्ट सेवाओं का विस्तार, नए दूतावासों की स्थापना, भारतीय छात्रों और प्रवासियों के लिए सहायता तंत्र तथा वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका ने देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत किया।
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लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत: जनता का विश्वास
2014, 2019 और 2024—लगातार तीन आम चुनावों में बहुमत के साथ सत्ता में वापसी नरेंद्र मोदी को भारतीय लोकतंत्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं की श्रेणी में खड़ा करती है। 4399 दिनों का यह सफर केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन करोड़ों मतदाताओं का भी है जिन्होंने लगातार तीन बार एक ही नेतृत्व पर भरोसा जताया।
निष्कर्ष
:12 वर्षों की इस यात्रा को समर्थक भारत के परिवर्तन, डिजिटल क्रांति, वैश्विक प्रतिष्ठा और विकास की नई कहानी के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक रोजगार, महंगाई, सामाजिक असमानता और संस्थागत संतुलन जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि उपलब्धियों और चुनौतियों पर बहस साथ-साथ चलती है। फिर भी एक तथ्य निर्विवाद है—10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी ने 4399 दिनों के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया इतिहास रच दिया है। नेहरू के बाद यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र के लंबे सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। समय तय करेगा कि इतिहास इस दौर को किस रूप में याद रखेगा, लेकिन इतना निश्चित है कि 2014 से 2026 तक का यह अध्याय भारत की राजनीतिक यात्रा के सबसे चर्चित और प्रभावशाली दौरों में हमेशा दर्ज रहेगा।
• लेखक चन्दन चौरसिया की खास रिपोर्ट
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