Date: 22/06/2026 Monday ABOUT US ADVERTISE WITH US Contact Us

भरत तिवारी एनकाउंटर: एनएचआरसी से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी जंग, नीतीश के पुराने बयान और भाजपा में बगावत से बिहार में सियासी उबाल

6/22/2026 2:55:55 PM IST

88
कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Aara/Patna : बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में 17 जून को हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब पूरी तरह से राष्ट्रीय और कानूनी मुद्दा बन चुका है। सरेंडर के बाद कथित तौर पर करीब से गोली मारने के आरोपों से घिरी बिहार पुलिस की इस कार्रवाई पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) दोनों की नजरें टिक गई हैं। इस घटना ने बिहार की एनडीए सरकार के भीतर भी एक नया सियासी संकट खड़ा कर दिया है।
 
एनएचआरसी पहुंचा मामला, CBI जांच की मांग
दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस कथित पुलिस मुठभेड़ के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक भरत तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। याचिका में आयोग से मांग की गई है कि घटना की निष्पक्ष और विस्तृत जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी या सीबीआई से कराई जाए, साथ ही आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।
 
सुप्रीम कोर्ट में त्वरित सुनवाई के लिए मेंशनिंग
इस बीच आज (22 जून 2026) सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने कोर्ट में इस मामले को लेकर त्वरित सुनवाई की मेंशनिंग (विशेष उल्लेख) की। हालांकि, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे तुरंत सुनने से इंकार कर दिया और याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे इसकी अर्जेंट लिस्टिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी मांग रखें। याचिका में मृतक के परिवार को सुरक्षा देने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग शामिल है।
 
नीतीश कुमार का पुराना बयान और 'पवन सिंह' की एंट्री
घटना के बाद सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक पुराना वीडियो (साल 2023 का) तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कहते दिख रहे हैं— "यदि कोई अपराधी आत्मसमर्पण करना चाहता है तो उसे गोली मार देना कानून नहीं हो सकता"। विपक्ष अब इसी बयान के सहारे सूबे की सम्राट चौधरी सरकार को घेर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भूचाल तब आया जब खुद सत्ताधारी भाजपा के कई स्थानीय नेताओं ने पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे सीधे 'मर्डर' करार दिया। वहीं, काराकाट से चुनाव लड़ चुके प्रसिद्ध कलाकार पवन सिंह ने भी भरत तिवारी के पक्ष में बयान जारी कर इसे समाज के लिए बड़ी क्षति बताया और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की है।
 
क्या है पुलिस की दलील और परिजनों का दावा?
पुलिस प्रशासन अपनी इस दलील पर अड़ा है कि भरत तिवारी लगातार फेसबुक लाइव पर हथियार लहरा रहे थे, जब पुलिस टीम उन्हें पकड़ने गई, तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस टीम पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
इसके विपरीत, चश्मदीदों और पीड़ित परिवार का कहना है कि भरत तिवारी ने अपनी बंदूक फेंककर सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद भी उन्हें खदेड़कर बेहद करीब से मारा गया। पुलिस की थ्योरी में 3 गोलियां लगने की बात थी, जबकि पोस्टमार्टम में शव से 5 गोलियां मिलने के दावे ने पुलिस को बैकफुट पर धकेल दिया है।
 
फिलहाल, जनाक्रोश को देखते हुए शाहपुर थाना अध्यक्ष सहित 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है और सरकार ने पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से इसकी न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए हैं।
 
सुलगते सवाल: क्या भरत तिवारी का एनकाउंटर वाकई पुलिस की आत्मरक्षा थी, या सरेंडर के बाद खाकी की आड़ में किया गया 'सरकारी मर्डर'? क्या सुप्रीम कोर्ट और एनएचआरसी की इस दस्तक से सच बाहर आएगा या यह खूनी रहस्य हमेशा के लिए दफन हो जाएगा?
 
आरा से आशुतोष पांडेय पटना से चंदन के साथ संजना सिंह कोयलांचल लाइव डेस्क