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 आईआईटी आईएसएम का इनोवेशन, खनिकों की सुरक्षा और आराम को मिली नई ताकत

8/2/2026 12:07:01 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
धनबाद :- धनबाद के आईआईटी आईएसएम ने भूमिगत खदानों में काम करने वाले खनिकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने चेयर लिफ्ट मैन-राइडिंग सिस्टम को अपग्रेड किया है। इस नई तकनीक से खनिकों को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, आरामदायक और कम कंपन वाली यात्रा मिलेगी, जिससे शारीरिक थकान और रीढ़ पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। आईआईटी आईएसएम के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ने भूमिगत खदानों में श्रमिकों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले चेयर लिफ्ट मैन-राइडिंग सिस्टम में महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए हैं। इस अपग्रेड के बाद सिस्टम पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, स्थिर और आरामदायक हो गया है। कम कंपन और झटकों के कारण खनिकों को सफर के दौरान होने वाली शारीरिक थकान और कमर व रीढ़ की समस्याओं से काफी राहत मिलेगी। परियोजना का नेतृत्व कर रहे सहायक प्राध्यापक डॉ. अजीत कुमार के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य केवल श्रमिकों की सुविधा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दक्षता में सुधार और बिजली की खपत को कम करना भी है। इसके लिए चेयर लिफ्ट सिस्टम के हाइड्रोलिक पावर पैक ड्राइव यूनिट में डिजाइन संशोधन किए गए हैं और बेहतर हैंड-पोजिशनिंग व सपोर्ट सिस्टम विकसित किया गया है। आईआईटी आईएसएम लगातार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर रहा है। संस्थान के शोधकर्ता केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खनन कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों के साथ मिलकर उनकी वास्तविक तकनीकी चुनौतियों का समाधान भी तैयार कर रहे हैं। डॉ. अजीत कुमार बताते हैं कि कई बार उद्योगों से प्राप्त समस्याओं पर शोध किया जाता है, जबकि कई अवसरों पर वैज्ञानिक स्वयं प्लांट और खदानों का दौरा कर तकनीकी चुनौतियों का अध्ययन करते हैं और उसी के अनुरूप नई तकनीक विकसित करते हैं। देश की भूमिगत खदानों में रोजाना हजारों खनिक चेयर लिफ्ट मैन-राइडिंग सिस्टम से सफर करते हैं। लगातार झटकों और कंपन से उन्हें कमर दर्द और रीढ़ पर दबाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए आईआईटी आईएसएम ने इस सिस्टम को अपग्रेड किया है। नई तकनीक से यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक और कम कंपन वाली होगी, जिससे खनिकों की थकान कम होगी और उनकी कार्यक्षमता भी बेहतर होगी।
 
कोयलांचल लाइव डेस्क