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भोलेनाथ से मांगी थी बेटी, अब 2 माह की लाडली को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा पर निकले पिता

8/2/2026 12:07:01 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team

मुंगेर :- श्रावणी मेले में आस्था के अनगिनत रंग देखने को मिलते हैं। कोई नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करता है, तो कोई दंडवत करते हुए बाबा बैद्यनाथ के दरबार तक पहुंचता है। लेकिन मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर इस बार एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है। यहां एक पिता अपनी महज दो माह की बेटी को खूबसूरती से सजी डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते हुए देवघर जा रहे हैं। उनकी यह अनोखी भक्ति और बेटी के प्रति प्रेम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मुजफ्फरपुर के रहने वाले मिथिलेश कुमार बताते हैं कि पिछले वर्ष वह अपने भाई की बेटी और परिवार के साथ बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए देवघर गए थे। यात्रा के दौरान उनके मन में एक ही इच्छा थी कि उनके घर भी एक बेटी का जन्म हो। उन्होंने भोलेनाथ से मन ही मन प्रार्थना की कि यदि उन्हें पुत्री का आशीर्वाद मिलेगा, तो वह अगली बार दंडवत यात्रा करते हुए अपनी बेटी को साथ लेकर बाबा के दरबार पहुंचेंगे। भोलेनाथ ने उनकी मनोकामना पूरी की और वर्ष 2026 में उनके घर एक बेटी का जन्म हुआ। मिथिलेश पहले से एक पुत्र के पिता हैं, लेकिन उनका कहना है कि बेटी के बिना परिवार अधूरा लगता था। उनका मानना है कि बेटी ईश्वर का सबसे बड़ा आशीर्वाद होती है और कन्यादान जैसा पुण्य भी बेटी के बिना संभव नहीं है। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वह अपनी दो माह की बेटी को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि बच्ची की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। डोली में पंखा, लाइट, सौर ऊर्जा से चलने वाली व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं लगाई गई हैं, ताकि यात्रा के दौरान बच्ची को गर्मी या किसी तरह की परेशानी न हो। यही वजह है कि जैसे ही यह डोली कच्ची कांवरिया पथ से गुजरती है, श्रद्धालुओं की भीड़ इसे देखने के लिए रुक जाती है। एक ओर जहां आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटी को बोझ समझा जाता है, वहीं मिथिलेश कुमार की यह यात्रा समाज को एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि बेटियां सम्मान, सौभाग्य और परिवार की खुशियों का आधार होती हैं। उनकी यह अनोखी कांवर यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे संदेश को भी मजबूती देती है। श्रावणी मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाओं के साथ बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचते हैं। लेकिन मुजफ्फरपुर के मिथिलेश कुमार की यह दंडवत यात्रा आस्था के साथ-साथ बेटी के सम्मान का ऐसा संदेश दे रही है, जो हर किसी के दिल को छू रहा है।

 

मुंगेर से कोयलांचल लाइव के लिए इम्तियाज़ खान की रिपोर्ट