Gumla : भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने आज गुमला जिला मुख्यालय स्थित एक होटल के सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में 12 अगस्त और राज्यसभा में 13 अगस्त को संशोधन विधेयक पारित हुआ। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में एकरूपता, पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस संशोधन को लेकर झारखंड में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। दीपक प्रकाश ने कहा कि संशोधन की मूल भावना ‘एक राष्ट्र, एक खनिज बाजार’ है। उनके अनुसार वर्तमान में खनिज उत्पादन पर विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क लगते हैं। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में Mineral Bearing Tax के नाम पर अतिरिक्त वसूली से यहां उत्पादित कोयले की लागत बढ़ती है, जिससे बाजार, निवेश और रोजगार प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्र में लागत कम होने और उत्पादन बढ़ने से राज्य को राजस्व तथा रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनिज ब्लॉकों में उत्पादन शुरू होने से राज्य को बड़े पैमाने पर राजस्व लाभ मिला है, जबकि झारखंड के कई खनिज ब्लॉक अब भी उत्पादन शुरू होने की प्रतीक्षा में हैं। दीपक प्रकाश ने कहा कि खनिज संसाधनों का समयबद्ध और पारदर्शी दोहन राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले खदान आवंटन की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे। मोदी सरकार द्वारा 2015 में खनिज ब्लॉकों की नीलामी व्यवस्था लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ी और राज्यों को खनिज राजस्व में सीधा लाभ मिलने लगा। उन्होंने कि वर्तमान समय क्रिटिकल मिनरल्स का है और देश को खनिज संसाधनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्पष्ट एवं स्थिर नीति आवश्यक है। वहीं, संशोधन को लेकर झारखंड सरकार और झामुमो ने राज्य के राजस्व एवं अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका जताई है।
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