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Akka Review: महिलाओं के साम्राज्य की जंग में कीर्ति-राधिका का जलवा, कैसी है नेटफ्लिक्स की पीरियड क्राइम ड्रामा...

10/30/2026 6:50:58 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की मुख्य भूमिका वाली पीरियड क्राइम ड्रामा सीरीज 'अक्का' ने नेटफ्लिक्स पर दस्तक दे दी है। मातृसत्ता के आस-पास बुनी गई कहानी सत्ता की फेरबदल की कोशिश, स्मगलिंग, क्राइम , धोखाधड़ी के ताने-बाने के साथ दिखाई गई है। इसका निर्देशन धर्मराज शेट्टी ने किया है वहीं यश राज फिल्म्स के बैनर तले इसे प्रोड्यूस किया गया है। कैसी है सीरीज, आइए जानते हैं इस रिव्यू में-
क्या है कहानी?
नेटफ्लिक्स (Netflix) की इस सीरीज की कहानी भारत की स्वतंत्रता के बाद की पृष्ठभूमि में एक ऐसे साम्राज्य के ईर्द-गिर्द बुनी गई है जिसका अतीत 800 साल पुराना है। इसकी कहानी एक काल्पनिक जगह पेर्नुरू की है जहां महिलाओं का शासन है और इस शासन की गद्दी पर 'अक्का' बैठती हैं। इतना ही नहीं इस साम्राज्य का उत्तराधिकारी भी एक लड़की ही होती है।कीर्ति सुरेश (Keerthy Suresh) ने मालेमार की शासक भवानी का किरदार निभाया है जिसकी विरासत में तब खतरा पैदा हो जाता है जब बॉम्बे से एक पावरफुल महिला रुद्रा (Radhika Apte) वहां आकर ऊथल पुथल मचा देती है और दावा करती है कि वह भी इस विरासत से जुड़ी हुई है।पीरियड सिनेमा को पर्दे पर उतारने में धर्मराज ने बारीकी से मेहनत की है। एक्टर्स की कॉस्ट्यूम से लेकर उनके लुक पर मेहनत की गई है।इसके अलावा म्यूजिक कहानी पर सटीक बैठता है वहीं सिनेमैटोग्राफी भी ठीकठाक है।सीरीज लंबी नहीं है, 5 एपिसोड में कहानी को बिना जल्दबाजी के सधे हुए अंदाज में दिखाया गया है।
कहां रह गई कमी?
सीरीज की सबसे बड़ी कमी इसका स्क्रीनप्ले है। कैरेक्टर्स और सेट भले ही कितने ही ग्रैंड और पावरफुल क्यों ना हो अगर कहानी में दम नहीं होगा तो बोरियत और कंफ्यूजन होना स्वाभाविक है।अक्का (Akka Web Series) की कहानी मातृसत्ता पर आधारित है जो एक यूनिक और अच्छा कॉन्सेप्ट है लेकिन 800 साल पुराना यह साम्राज्य सिर्फ एक लड़की के आने से आसानी से ऊथल-पुथल हो जाता है, यह पचाना थोड़ा मुश्किल लगता है।इसके अलावा महिलाओं के द्वारा चलाए जा रहे शासन की नींव काफी पुरानी है और इसका प्रभाव साम्राज्य की छोटी-छोटी बातों पर दिखना चाहिए, जैसे जब भवानी को हथकड़ी पहनाकर ले जाया जाता है लेकिन कोई विरोध नहीं करता। मालेमार में सरेआम हत्याएं होती रहती हैं लेकिन कोई सवाल नहीं उठाता।आखिर इतने भव्य साम्राज्य की महिलाएं और योद्धा अचानक इतनी कमजोर कैसे हो सकती हैं? ये सवाल मन में बार-बार उठ सकता है। स्क्रीनप्ले पर और मेहनत की जानी चाहिए थी।
देखें या नहीं?
कीर्ति सुरेश की पावरफुल परफॉर्मेंस और लगभग 30-30 मिनट के 5 एपिसोड्स की सीरीज (जो कि ज्यादा लंबा वक्त नहीं है) को एक मौका दे सकते हैं।
 
कोयलांचल लाइव डेस्क