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चोर ने  तकनीक से  स्कॉर्पियो  तोड़ दिया ताला,झारखंड-बिहार से नेपाल तक हो रही  ‘हाई-टेक’ वाहन चोर गिरोह की चर्चा 
 

11/8/2026 4:12:10 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Giridih  :अब चोर ताला नहीं, तकनीक तोड़ते हैं। लैपटॉप, कोडिंग सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक जैमर—ये सिर्फ ऑफिस के गैजेट नहीं, बल्कि अब वाहन चोरों के नए हथियार बन चुके हैं। गिरिडीह में ऐसे ही एक ‘हाई-टेक’ गिरोह का खुलासा हुआ है, जो स्कॉर्पियो जैसी महंगी एसयूवी के डिजिटल लॉक को चंद मिनटों में पार कर उसे नेपाल की सीमा तक पहुंचाने का आरोप में है।
 
गिरिडीह के पचंबा थाना क्षेत्र के तेलोडीह से चोरी हुई काले रंग की स्कॉर्पियो को पुलिस ने बिहार के पूर्वी चंपारण के नारायण टोला से बरामद किया है, जो नेपाल सीमा के निकट है। घटना ने झारखंड-बिहार में सक्रिय वाहन तस्करी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
चोरी के बाद सीमा तक का सफर
 
पचंबा थाना क्षेत्र के तेलोडीह टोला कुसमाटांड़ निवासी की काले रंग की स्कॉर्पियो क्लासिक S-11 MT 7S को 2 नवंबर की देर रात घर के सामने से चोर ले गए थे। वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर JH01FL-8863 था और मामले में पचंबा थाना में कांड संख्या 113/26 दर्ज किया गया।
 
सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने चोरों के रूट को ट्रैक किया। जांच में सामने आया कि अपराधी पहले जमुई और फिर लखीसराय के रास्ते बिहार में दाखिल हुए, जहां से वे नेपाल सीमा की ओर बढ़ रहे थे।
 
नेपाल बॉर्डर पर मिली स्कॉर्पियो
 
एसपी डॉ. बिमल कुमार के निर्देश पर डीएसपी मुख्यालय-2 आर.के. राणा की देखरेख में विशेष टीम गठित की गई। पचंबा थाना प्रभारी राजीव कुमार के नेतृत्व में पुलिस बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के झरोखर थाना क्षेत्र के नारायण टोला पहुंची, जो नेपाल सीमा के निकट है।
 
छापेमारी के दौरान अपराधी गाड़ी छोड़कर सीमा की ओर भाग निकले, लेकिन पुलिस ने स्कॉर्पियो को सकुशल बरामद कर लिया। चार दिन के भीतर वाहन बरामद होने की पुष्टि अलग रिपोर्ट में भी हुई है।
 
लैपटॉप, कोडिंग और जैमर का खेल
 
पुलिस को शक है कि गिरोह आधुनिक वाहनों के सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास करने के लिए लैपटॉप और विशेष कोडिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है। आरोप है कि चोरी के बाद वाहन में नया लॉक लगाकर उसे स्टार्ट किया जाता है।
 
पुलिस के अनुसार, वारदात के समय इलेक्ट्रॉनिक जैमर का भी इस्तेमाल हो सकता है, ताकि गाड़ी का जीपीएस ट्रैकर और इमरजेंसी सायरन बाधित हो सके। हालांकि, यह तकनीकी पक्ष अभी पुलिस की जांच का हिस्सा है और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इसकी पूरी पुष्टि हो सकेगी।
 
चोरी की गाड़ी से आए थे चोर,सीसीटीवी से खुला राज
 
सीसीटीवी फुटेज में चोर एक सफेद टाटा नेक्सन में पहुंचे थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह नेक्सन भी चोरी की गई थी और उसे कुछ समय पहले देवघर से चुराया गया था। यानी चोरी के लिए भी चोरी की गई गाड़ी इस्तेमाल हुई।
 
पुलिस को संकेत मिले हैं कि इसी तरह की चोरियां झारखंड के दुमका, हजारीबाग और बिहार के औरंगाबाद व मुजफ्फरपुर में भी हुई हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह S-11 जैसी महंगी गाड़ियों को चुराकर नेपाल तक पहुंचाने की तैयारी में सक्रिय है, क्योंकि वहां इन वाहनों की मांग अधिक है।
 
बड़ा नेटवर्क की आशंका,अब गिरफ्तारी की तैयारी
 
गिरिडीह में चोरी हुई स्कॉर्पियो को नेपाल सीमा के पास से बरामद करना पुलिस की बड़ी सफलता है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। जिस गिरोह के सदस्य लैपटॉप और कोडिंग से आधुनिक वाहनों के डिजिटल लॉक तोड़ने की क्षमता रखते हैं, उन्हें पकड़ना ही असली परीक्षा होगी। पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि नेटवर्क कितना बड़ा है, कौन-कौन जिलों में इसके लिंक हैं और चोरी की गाड़ियां सीमा पार कैसे पहुंचती हैं।
 
जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, यह खबर सिर्फ एक बरामदगी की नहीं—बल्कि उस ‘हाई-टेक चोर गिरोह’ की खतरनाक तस्वीर है, जो ताले नहीं, तकनीक तोड़ता है।
 
गिरिडीह से कोयलांचल लाइव के लिए नरेश गोस्वामी की रिपोर्ट