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निरसा विधायक जी को गुस्सा क्यों आता है ?
8/13/2025 4:41:07 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dhanbad :
केवल एक छात्र के लिए पॉलिटेक्निक प्रवेश के लिए चयनित 30 छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ विधायक की इस कारिस्तानी की चर्चा विधान सभा के पटल पर आनी चाहिए तथा यह निर्धारित होनी चाहिए कि विधायक जी की प्रतिष्ठा किन-किन बातों पर है और उसे कितना तबज्जो मिलना चाहिए ? समय झूठ ना बोलवाये लेकिन एक पत्रकार से विधायक जी ने किस प्रकार अपनी प्रतिष्ठा का रोना रोया तथा पत्रकार भी मिन्नतें करता रहा कि इसमें उक्त चयनित चयनित 30 छात्रों का क्या कसूर है और वे उक्त विधायक की प्रतिष्ठा के दाव पर वह क्यों लगें ? अगर इसी मामले को लेकर सभी पीड़ित छात्र न्याय मांगने लिखित रूप से कोर्ट चलें जाएँ तो क्या होगा विधायक जी की प्रतिष्ठा का ? वह बनेगा कि बिगड़ेगा ? आज अतिरिक्त दबाव पड़ने पर शायद उनका नामांकन संबंधित संस्थान में हो भी जाए लेकिन संबंधित प्रश्न का जवाब तो निरुत्तर रह जाएगा। मौजूदा दौर में विधायक जी उसी विधायक के पुत्र हैं जिन्होंने अपने उसी निरसा क्षेत्र के लिए अपनी जान तक गवां दी थी।
जहां तक निरसा विधानसभा क्षेत्र की बात है तो इस विधानसभा क्षेत्र में कोयला चोरी, आपराधिक वारदात ,अवैध उत्खनन के किस्से भरे पड़े हैं। क्या इससे निरसा विधायक की प्रतिष्ठा नहीं जुड़ी ? यह जवाब उन्हें देना होगा और जनता विशेष कर उक्त 30 पीड़ित छात्र चिल्ला चिल्लाकर यह प्रश्न कर रहे हैं ? लोकतंत्र में विधायक जैसे जनप्रतिनिधि ने क्या-क्या अब तक गवाया है यह बताना जरूरी नहीं समझता। खासकर उनके पिता स्वर्गीय गुरदास चटर्जी ने तो जान तक गवा दी थी लेकिन कभी कोई समझौता नहीं किया । उनके गुरू पूर्व सांसद ए के राय तो धनबाद नहीं राष्ट्रिय स्तर पर जो जगह बनाई है वह जगह बनाने के लिए आज के सांसदों को सोंचना पड़ेगा। उन्होंने अपने सांसद रहते कोई पारिश्रमिक तक न लेकर इतिहास रच दी। जिससे आज के सांसदों को सीख लेनी चाहिए। झारखंड में लाल और हरा झंडा मैत्री की जो पहल उन्होंने की थी उसे सदैव याद किया जाता रहेगा। उनके शिष्य गुरुदास चटर्जी और आनंद महतो ने तोअब तक निभा दी है । पर उनके पुत्र क्या कर रहें हैं ? औरों के नक्शे कदम पर ना सही कम से कम अपने पिता के नक्शे कदम पर तो चलें । उससे तुम्हारे साथ साथ औरों का भी भला होगा। 30 पॉलिटेक्निक प्रवेश के चयनित छात्रों के भविष्य विधायक जी के मेहरबानी से आज दाव पर लगी हुई है । दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है क्षेत्र के विधायक की प्रतिष्ठा पर उपायुक्त को हस्तक्षेप करके विधायक जी की उक्त संस्थान में मारे ताले को अपील करके खोलवान पड़ा। विधानसभा में उक्त विधायक जी से प्रश्न होना चाहिए कि जनहित के एक तकनीकी संस्थान को इस प्रकार ताला जड़ देना कहां तक विधायक के विशेष अधिकार में आता है ? इसको लेकर विपक्ष अपना अंक गणित ठीक करने में लगा हुआ है। सम्भतः भविष्य में यह मामला विधान सभा में आ भी जाय जिसके लिए न केवल विधायक जी बल्कि उनके गठबंधन को भी परेशानी आ सकती है।
कोयलांचल लाइव डेस्क
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