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नए यूजीसी नियम को लेकर कांग्रेस को करना चाहिए विरोध दर्ज- ऋषिकेश मिश्रा अधिवक्ता
1/28/2026 3:39:35 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ranchi: देश में लागू किए जा रहे नए यूजीसी नियमों तथा प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं मध्यमवर्गीय समाज में भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना व्याप्त है। यह स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है कि इन नियमों का उपयोग मेरिट, अकादमिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। ये नियम शिक्षा सुधार के नाम पर केन्द्रिकरण, प्रशासनिक हस्तक्षेप और लोकतांत्रिक ढांचे के क्षरण का माध्यम बनते जा रहे हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्त बनाने के बजाय उन्हें नौकरशाही नियंत्रण में लाया जा रहा है, जो संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि स्वतंत्रता के बाद दशकों तक सामान्य वर्ग कांग्रेस पार्टी का कोर वोट बैंक रहा है। किंतु 1990 के बाद, जब आरक्षण नीतियों को संतुलन और मेरिट की पर्याप्त सुरक्षा के बिना लागू किया गया, तब सामान्य वर्ग का एक बड़ा तबका राजनीतिक रूप से हाशिये पर चला गया और मजबूरी में भाजपा एवं आरएसएस की ओर आकर्षित हुआ। नए यूजीसी नियम और प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 उसी राजनीतिक दूरी को और गहरा करने का कार्य कर रहे हैं। यदि इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी स्पष्ट और मुखर विरोध दर्ज नहीं कराती है, तो यह संदेश जाएगा कि सामान्य वर्ग की चिंताओं को फिर से अनदेखा किया जा रहा है।
झारखण्ड हिघ्कोर्ट के अधिवक्ता सह कांग्रेस नेता की मुख्य मांगे :
•
नए यूजीसी नियमों एवं प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 को तत्काल वापस लिया जाए या स्थगित किया जाए।
•
इन प्रावधानों पर संसद में विस्तृत बहस एवं राष्ट्रव्यापी परामर्श कराया जाए।
•
सामाजिक न्याय और मेरिट के बीच संतुलन, अकादमिक स्वतंत्रता और संवैधानिक समानता की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
यह केवल शिक्षा नीति का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं, मध्यवर्ग और कांग्रेस पार्टी के भविष्य से जुड़ा एक निर्णायक राजनीतिक प्रश्न है। कांग्रेस यदि इस मुद्दे पर साहसिक और न्यायसंगत रुख अपनाती है, तो वह सामान्य वर्ग के बीच खोए हुए विश्वास को पुनः अर्जित कर सकती है।
देश का युवा, शिक्षक समाज और सामान्य वर्ग अब चुप नहीं रहेगा ।
कोयलांचल लाइव डेस्क
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