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भगवान को अर्पित पूजा सामग्री कूड़े के ढेर में में मिला , श्रद्धालुओं में दिखा नाराजगी, महावीर मंदिर की स्वच्छता एवं प्रबंधन व्यवस्था पर उठे सवाल

6/10/2026 12:05:20 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ara  :  धार्मिक आस्था और श्रद्धा का केंद्र माने जाने वाले रमना मैदान स्थित महावीर मंदिर परिसर से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मंदिर में भगवान को अर्पित किए गए फूल-माला, तुलसी दल, पत्ते एवं अन्य पूजन सामग्री का सम्मानजनक निस्तारण करने के बजाय उन्हें ऐसे स्थान पर फेंका जा रहा है, जहां पहले से कूड़े-कचरे का ढेर लगा हुआ है तथा आसपास गंदगी और मलमूत्र के निशान भी देखे जा सकते हैं। स्थल से प्राप्त तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पूजा में प्रयुक्त फूल-मालाएं, तुलसी पत्तियां और अन्य धार्मिक सामग्री प्लास्टिक कचरे, प्रसाद एवं नाश्ते के खाली डिब्बों, डिस्पोजल कप-प्लेटों तथा निर्माण मलबे के साथ बिखरी पड़ी हैं। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए गए खाद्य पदार्थों के पैकेट और अन्य अपशिष्ट भी उसी स्थान पर फेंके जाने की बात सामने आई है। इस बात को लेकर  श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान को अर्पित की गई सामग्री सामान्य कचरा नहीं होती, बल्कि वह धार्मिक आस्था और सम्मान का प्रतीक होती है। ऐसी पवित्र सामग्री को गंदगी के बीच फेंकना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। उनका मानना है कि पूजा सामग्री के लिए अलग संग्रहण एवं सम्मानजनक निस्तारण की व्यवस्था होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने मंदिर प्रशासन से मांग की है कि पूजा सामग्री और सामान्य कचरे के पृथक्करण की व्यवस्था तत्काल की जाए। साथ ही जैविक एवं अजैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित सफाई और स्वच्छता व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाए। उनका कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि धार्मिक संस्कार, अनुशासन और स्वच्छता का भी केंद्र होता है। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि भगवान को अर्पित फूल-माला और तुलसी दल का सम्मानजनक निस्तारण क्यों नहीं किया जा रहा है? मंदिर परिसर में प्रतिदिन निकलने वाले पूजा सामग्री और अन्य कचरे के प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई है? क्या मंदिर प्रशासन इस स्थिति से अनभिज्ञ है या फिर लंबे समय से इसकी अनदेखी की जा रही है? इस मामले ने मंदिर की स्वच्छता व्यवस्था तथा प्रशासनिक प्रबंधन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए न तो प्रभावी कदम उठाए गए हैं और न ही स्थायी व्यवस्था विकसित की गई है। 
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट