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ढाई साल की वाणी का कमाल, 153 देशों के झंडे पहचानकर बनाया रिकॉर्ड

8/1/2026 4:28:53 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team

गया : बिहार के गया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आपको हैरान कर देगी। महज 2 साल 10 महीने की उम्र में सैकड़ों देशों के झंडे पहचानकर उनके नाम बताने वाली नन्हीं बच्ची ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से सभी को चौंका दिया है। गया जिले के टेकारी अनुमंडल के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली नन्हीं वाणी ने अपनी इस अनोखी प्रतिभा के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। अब वाणी और उसके परिवार की नजर प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। इसके लिए वाणी को दुनिया के 195 देशों के झंडों की पहचान करनी होगी। ये तस्वीरें गया जिले के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली महज 2 साल 10 महीने की नन्हीं वाणी की हैं। उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन उसकी प्रतिभा ऐसी है कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। वाणी को अलग-अलग देशों के झंडे दिखाइए, वह तुरंत उन्हें पहचानकर संबंधित देश का नाम बता देती है। बताया जा रहा है कि वाणी अब तक 153 से अधिक देशों के झंडों की पहचान कर उनके नाम बता चुकी है। वाणी की इस अद्भुत प्रतिभा का पता उसके पिता रविकांत कुमार को तब चला, जब ढाई साल की उम्र में खेल-खेल में उसने एक पोस्टर पर बने 20 देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बता दिए। इसके बाद पिता ने उसकी प्रतिभा को गंभीरता से लिया और उसे निखारने का प्रयास शुरू किया। कुछ ही समय में वाणी ने 45 एशियाई देशों के झंडों की पहचान करना सीख लिया। 29 जून 2026 को 45 एशियाई देशों के झंडों की पहचान करने के लिए उसे पहला पुरस्कार मिला। इसके बाद परिवार ने उसकी तैयारी और तेज कर दी। महज 10 दिनों के भीतर वाणी ने 127 देशों के झंडों की पहचान करने की क्षमता हासिल कर ली। परिवार ने इसका वीडियो इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड को भेजा, जिसके बाद वाणी का रिकॉर्ड स्वीकार कर लिया गया।परिजनों के अनुसार, वाणी ने 127 देशों के झंडों की पहचान कर उनके नाम मात्र 6 मिनट 35 सेकंड में बताए। इससे पहले उसने 45 देशों के नाम 2 मिनट 10 सेकंड में बताए थे, जिसके आधार पर उसे प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया था। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से वाणी को मेडल, आई-कार्ड और रिकॉर्ड बुक देकर सम्मानित किया गया है। बेटी की इस उपलब्धि से उसके पिता रविकांत कुमार बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वाणी को बचपन से ही रंगों में विशेष रुचि रही है। यही वजह है कि वह झंडों के रंग और डिजाइन देखकर उन्हें आसानी से पहचान लेती है। अब परिवार का लक्ष्य वाणी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना है। वाणी की मां पल्लवी मिश्रा और परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी प्रतिभा से बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि दोनों बेटियां अभी छोटी हैं और अल्फाबेट भी पूरी तरह नहीं जानतीं, लेकिन वाणी सैकड़ों देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बता देती है। यही कारण है कि पूरा परिवार उसकी इस प्रतिभा को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। वाणी के दादा राम पांडे बताते हैं कि उनकी पोती की रंगों को पहचानने की क्षमता बेहद शानदार है। वह झंडों के रंग और पैटर्न देखकर तुरंत संबंधित देश का नाम बता देती है। परिवार ने अब दुनिया के 195 देशों के झंडों की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि वाणी जल्द से जल्द गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा सके। गया की नन्हीं वाणी की यह प्रतिभा वाकई अद्भुत है। जिस उम्र में बच्चे खेल-खेल में अक्षर और रंग सीखते हैं, उस उम्र में वाणी सैकड़ों देशों के झंडों की पहचान कर उनके नाम बता रही है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद अब उसकी नजर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। यदि वाणी 195 देशों के झंडों की सफलतापूर्वक पहचान कर लेती है, तो वह न केवल बिहार और गया, बल्कि पूरे देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर सकती है।

 

ग़या से कोयलांचल लाइव से मनोज कुमार की रिपोर्ट