गया: गया के मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज में प्रशासनिक और वित्तीय विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गवर्निंग बॉडी द्वारा पूर्व सचिव हाफिजुर रहमान खान पर अवैध वित्तीय निकासी के आरोप लगाए जाने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने आकर इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और साजिश करार दिया है। साथ ही उन्होंने कॉलेज प्रशासन और प्रबंधन पर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व सचिव हाफिजुर रहमान खान ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वयं कॉलेज में हो रही वित्तीय निकासी पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि कोर्ट में मुकदमे लड़ने के नाम पर लगातार राशि निकाली जाती रही, लेकिन यह पैसा किसे और किस मद में दिया गया, इसका कोई रिकॉर्ड या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा था। हाफिजुर रहमान ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब कॉलेज के तत्कालीन अध्यक्ष शब्बीर आरफीन शमसी विदेश यात्रा पर थे, तब कार्यवाहक अध्यक्ष ने उन पर अपने परिवार के लोगों की कॉलेज में नियुक्ति करने का दबाव बनाया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस दबाव को मानने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसके बाद से उन्हें निशाना बनाया जाने लगा। उन्होंने कॉलेज काउंसिल की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान अध्यक्ष अशफाक के काउंसिल सदस्य होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है, जबकि उनका नाम वर्ष 1980 से कॉलेज की काउंसिल सूची में दर्ज है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए अवैध निकासी के सभी आरोप तथ्यहीन हैं। यदि किसी के पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं, इस पूरे विवाद पर कॉलेज के प्राचार्य अली हुसैन ने कहा कि पूर्व सचिव को गवर्निंग बॉडी के निर्णय के तहत पद से हटाया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व सचिव के बेटे और अन्य परिजनों की कॉलेज में नियुक्तियां हुई हैं, लेकिन उनका दावा है कि सभी नियुक्तियां निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत की गई हैं। प्राचार्य अली हुसैन ने अपने ऊपर लगाए गए फर्जी प्रमाणपत्र के आरोपों को भी सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके प्रमाणपत्र को फर्जी साबित कर दे, तो वे कानून के तहत मिलने वाली किसी भी सजा को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
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