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मुंगेर के 37 करोड़ के मॉडल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, इमरजेंसी में मिला सिर्फ एक डॉक्टर

8/9/2026 11:54:45 AM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team

मुंगेर : मुंगेर के करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने मॉडल सदर अस्पताल में अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर मरीजों का इलाज कितने डॉक्टर करेंगे? बिहार विधानसभा की शून्यकाल समिति के औचक निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी वार्ड में सिर्फ एक डॉक्टर मौजूद मिला। इस पर टीम ने नाराजगी जताई। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ 18 डॉक्टर कार्यरत बताए जा रहे हैं। यानी डॉक्टरों के 14 पद खाली हैं। वहीं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी सामने आई है। सर्जिकल सेवाएं फिलहाल एक ही सर्जन के भरोसे चलने की बात सामने आई है। दरअसल, रविवार को बिहार विधानसभा की शून्यकाल समिति की छह सदस्यीय टीम में शामिल तीन विधायक अचानक मुंगेर मॉडल सदर अस्पताल पहुंचे। इनमें परबत्ता विधायक बाबूलाल शौर्य, पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान और सुल्तानगंज विधायक ललित नारायण मंडल शामिल थे। विधायकों ने अस्पताल की इमरजेंसी समेत विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब टीम इमरजेंसी वार्ड पहुंची तो वहां सिर्फ एक डॉक्टर मौजूद मिला। इस पर समिति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रविवार या अन्य अवकाश के दिनों में भी मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए। टीम ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी सीधे बातचीत की और दवाओं की उपलब्धता, जांच की व्यवस्था और इलाज से जुड़ी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मरीजों ने भी अपनी समस्याएं और परेशानियां समिति के सामने रखीं। निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी समस्या डॉक्टरों की कमी के रूप में सामने आई। अस्पताल में डॉक्टरों के 32 पद स्वीकृत हैं, जबकि 18 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इसके चलते 14 पद खाली हैं। इतना ही नहीं, कई डॉक्टरों के पास अतिरिक्त विभागों का प्रभार भी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी अस्पताल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। सर्जिकल सेवाएं फिलहाल एक ही सर्जन के भरोसे संचालित होने की बात सामने आई है। करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मॉडल अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है, लेकिन डॉक्टरों की कमी अब मरीजों के बेहतर इलाज के रास्ते में बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। विधायकों ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भरोसा बढ़ाना और अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाना है। इसी उद्देश्य से विधानसभा की शून्यकाल समिति जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य संस्थानों का भी निरीक्षण कर रही है, ताकि वहां सामने आने वाली कमियों और समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा जा सके। अब बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से अस्पताल की इमारत और सुविधाएं तो तैयार हो गईं, लेकिन मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर कब उपलब्ध होंगे?

 

मुंगेर से कोयलांचल लाइव के लिए इम्तियाज़ खान की रिपोर्ट