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कंधे पर दिव्यांग दोस्त, 105 KM की कांवड़ यात्रा पर निकला दीपक

8/12/2026 2:40:17 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Munger : सावन में कांवड़ियों की भीड़ और हर तरफ गूंजता बोल बम का जयकारा। लेकिन सुल्तानगंज से देवघर के बीच कांवरिया पथ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि सच्ची दोस्ती की मिसाल भी पेश करती है। एक दोस्त पैरों से दिव्यांग है, लेकिन दूसरे दोस्त ने उसका हौसला टूटने नहीं दिया। उसने अपने दिव्यांग दोस्त को कंधे पर बैठाया और निकल पड़ा 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर। काशी के रहने वाले दीपक कनौजिया और उनके बचपन के दोस्त प्रमोद पांडे की यह कहानी कांवरिया पथ पर लोगों का ध्यान खींच रही है। कंधे पर दोस्त, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और आंखों में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की आस। सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा। लेकिन यह सफर सिर्फ दीपक का नहीं है। दीपक के कंधे पर उनके बचपन के दोस्त प्रमोद पांडे भी हैं। प्रमोद दिव्यांग हैं और अपने पैरों पर चल नहीं सकते। लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल चढ़ाने की उनकी इच्छा को दोस्त दीपक ने कभी उनकी मजबूरी नहीं बनने दिया। प्रमोद जब दूसरे कांवड़ियों को देवघर की ओर जाते देखते थे, तो उनके मन में भी बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की इच्छा होती थी। लेकिन पैर साथ नहीं देते थे। ऐसे में दीपक ने दोस्त की मजबूरी को अपनी जिम्मेदारी बना लिया। दीपक ने प्रमोद को अपने कंधे पर बैठाया और हर साल सावन में बाबा के दरबार की ओर निकल पड़ते हैं। यह सिलसिला आज का नहीं, बल्कि पिछले आठ साल से जारी है। इस बार भी दोनों करीब आठ दिनों में 105 किलोमीटर का सफर पूरा करने के संकल्प के साथ निकले हैं। रास्ता लंबा है, कंधे पर दोस्त का भार है, लेकिन दोस्ती और आस्था का हौसला उससे कहीं ज्यादा मजबूत है। दीपक के लिए यह सिर्फ कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि दोस्ती का फर्ज है। वहीं, प्रमोद के लिए दीपक सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि उनके पैरों की ताकत हैं। दीपक की जुबान पर अपने दोस्त के लिए सिर्फ एक दुआ है कि महादेव उनके दोस्त को हमेशा खुश रखें। वहीं, प्रमोद भी बाबा से अपने दोस्त दीपक के लिए यही प्रार्थना करते हैं कि जिंदगी के हर मोड़ पर उनका साथ यूं ही बना रहे। दोस्ती सिर्फ साथ चलने का नाम नहीं है। जरूरत पड़ने पर दोस्त के लिए उसके पैरों की ताकत बन जाना ही सच्ची दोस्ती है। सुल्तानगंज से देवघर तक आस्था के इस रास्ते पर दीपक और प्रमोद की कहानी बता रही है कि जब दोस्ती सच्ची हो, तो 105 किलोमीटर का रास्ता भी छोटा पड़ जाता है।
 
मुंगेर से कोयलांचल लाइव के लिए इम्तियाज़ खान की रिपोर्ट