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“झरिया में रोजगार का वादा, लोदना में मजदूरों का रोजगार संकट! 25 साल के MDO के बीच रोड सेल पर बड़ा सवाल”

8/30/2026 1:52:09 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Dhanbad :  झरिया में एक ओर केंद्र और राज्य सरकार विस्थापन के साथ प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का भरोसा दे रही है, तो दूसरी ओर कोयला क्षेत्रों में रोड सेल से जुड़े असंगठित मजदूरों के रोजगार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के लोदना क्षेत्र का है, जहां रोड सेल में कोयला लोडिंग प्रभावित होने से बड़ी संख्या में असंगठित मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने का दावा किया जा रहा है।मजदूर संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि लोदना क्षेत्र में करीब 5 हजार असंगठित मजदूर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोड सेल से जुड़े काम पर निर्भर रहे हैं। इनमें ट्रकों में कोयला लोड करने, मजदूरी, परिवहन से जुड़े छोटे-मोटे काम और अन्य गतिविधियों से जुड़े लोग शामिल हैं। रोड सेल का काम प्रभावित होने से इन परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ने की बात कही जा रही है।
 
25 साल के MDO से बदली व्यवस्था?
 
BCCL के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक लोदना क्षेत्र के NTST-Kujama प्रोजेक्ट में MDO व्यवस्था के तहत काम आवंटित किया गया है और संबंधित अनुबंध की संभावित अवधि 25 वर्ष दर्ज है। BCCL के रिकॉर्ड में इस प्रोजेक्ट के लिए M/S DCPL-GCL Consortium का नाम और 18 सितंबर 2023 की LOA तारीख दर्ज है। कोयला मंत्रालय की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक लोदना क्षेत्र के NTST-Kujama में MDO मोड के तहत कोयला उत्पादन अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि MDO और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के विस्तार के बीच वर्षों से रोड सेल के जरिए रोजगार हासिल करने वाले स्थानीय असंगठित मजदूरों के लिए रोजगार का विकल्प क्या होगा?
 
रोड सेल से जुड़ा है स्थानीय अर्थतंत्र :
 
बीसीसीएल के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि लोदना और बस्ताकोला क्षेत्रों में रोड मोड के जरिए कोयला डिस्पैच की व्यवस्था रही है। वर्ष 2024 के BCCL ई-ऑक्शन दस्तावेज में लोदना क्लस्टर के लिए 70 हजार टन और बस्ताकोला के लिए 60 हजार टन की पेशकश दर्ज थी। लोदना में अमल. जयरामपुर और कुजामा तथा बस्ताकोला में कुईया OCM से रोड मोड की मात्रा दर्ज की गई थी।
अब इससे अंदाजा यही लगाया जा सकता है कि रोड सेल सिर्फ कोयला बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में परिवहन और मजदूरी से जुड़े लोगों के लिए भी आर्थिक गतिविधि का बड़ा आधार भी  रहा है।
 
‘30 प्रतिशत रोड सेल’ के दावे पर भी उठे सवाल : 
 
स्थानीय मजदूरों की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि निर्धारित व्यवस्था के तहत उत्पादन का एक हिस्सा रोड सेल के माध्यम से भेजा जाना चाहिए। हालांकि, इस 30 प्रतिशत के दावे की पुष्टि के लिए संबंधित NIT/NID की मूल शर्तों और वर्तमान लागू व्यवस्था को सार्वजनिक रूप से सामने लाना जरूरी है। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर रोड सेल की व्यवस्था में बदलाव हुआ है, तो वर्षों से इस व्यवस्था पर निर्भर असंगठित मजदूरों के पुनर्वास या वैकल्पिक रोजगार की जिम्मेदारी किसकी होगी?
 
मजदूरों का आरोप—आवाज उठाने वाला कौन?
 
इस मामले को लेकर स्थानीय मजदूरों ने कोयलांचल लाइव के संवाददाता संजना सिंह को बताया की  रोड सेल बंद या प्रभावित होने के बावजूद उनकी समस्याओं को किसी भी राजनीतिक दल के नेता नहीं उठा रहे है। मजदूरों का कहना है कि जिन लोगों ने वर्षों तक कोयला कारोबार और स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर हम असंगठित मजदूरों की आवाज उठाई, वे अब उनकी समस्याओं पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। कारण यहाँ सब का  मिलीभगत या कमीशन के खेल बोले तो कोई गलत नहीं।  
 
BCCL प्रबंधन से मजदूरों के सवाल :
 
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर MDO और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के जरिए कोयला उत्पादन और संचालन का स्वरूप बदल रहा है, तो स्थानीय असंगठित मजदूरों के रोजगार का क्या होगा? क्या रोड सेल को पूरी तरह बंद करने या सीमित करने की स्थिति में उनके लिए कोई वैकल्पिक रोजगार व्यवस्था बनाई गई है? क्या स्थानीय मजदूरों को आउटसोर्सिंग और MDO परियोजनाओं में प्राथमिकता देने की कोई स्पष्ट व्यवस्था है? और सबसे अहम सवाल —झरिया के विस्थापन के बीच जब सरकार रोजगार देने की बात कर रही है, तो वर्षों से कोयला क्षेत्रों में मेहनत कर अपने परिवार का पेट पाल रहे इन असंगठित मजदूरों के रोजगार की गारंटी कौन देगा? इन सवालों का जवाब अब BCCL प्रबंधन, स्थानीय जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से असंगठित मजदूर और उनके बच्चे मांग रहे है। 
 
संजना सिंह कोयलांचल लाइव डेस्क