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भोजपुर में आइसा ने 5 हजार छात्रों को सदस्य बनाने का रखा लक्ष्य

10/25/2026 1:50:53 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ara : छात्र संगठन आइसा की भोजपुर जिला कमिटी की एकदिवसीय बैठक रविवार को भाकपा-माले जिला कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता आइसा के जिलाध्यक्ष विकास कुमार ने की, जबकि संचालन जिला सचिव जयशंकर प्रसाद ने किया। बैठक में संगठन के पिछले कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ नागपुर में होने वाले अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा की गई। इस दौरान भोजपुर जिले में पांच हजार छात्रों को संगठन से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बैठक में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लगातार बढ़ती फीस, छात्रसंघ चुनाव कराने, शैक्षणिक संस्थानों की बदहाल स्थिति तथा छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। आइसा नेताओं ने कहा कि शिक्षा महंगी होने से गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। संगठन ने फीस वृद्धि पर रोक लगाने और छात्रसंघ चुनाव कराकर शिक्षण परिसरों में लोकतांत्रिक माहौल बहाल करने की मांग की। आइसा जिलाध्यक्ष विकास कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ती फीस और छात्रसंघ चुनाव नहीं होना छात्र विरोधी नीतियों का परिणाम है। शिक्षा व्यापार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का बुनियादी अधिकार है। गरीब और वंचित परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि फीस वृद्धि के खिलाफ और छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर जिलेभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। नागपुर में होने वाला राष्ट्रीय सम्मेलन छात्र आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा देगा। भोजपुर में पांच हजार छात्रों को संगठन से जोड़कर शिक्षा, लोकतंत्र और छात्र अधिकारों की लड़ाई को व्यापक बनाया जाएगा। आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय कुमार ने कहा कि ‘फुले, भगत सिंह, अंबेडकर के रास्ते’ का नारा सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक चेतना, समानता और शोषणमुक्त समाज के निर्माण का संकल्प है। महात्मा ज्योतिबा फुले ने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का माध्यम बनाया, भगत सिंह ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोषणविहीन समाज का सपना देखा, जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान, समानता, सामाजिक न्याय और शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के विचार आज भी छात्र-नौजवानों को अन्याय और भेदभाव के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देते हैं। आइसा शिक्षा के निजीकरण, सांप्रदायिकता, जातिवाद और छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाएगा। नागपुर का राष्ट्रीय सम्मेलन इन विचारों को देशभर के छात्र-युवाओं तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। आइसा के राज्य सचिव दीपांकर मिश्रा ने कहा कि ‘शिक्षा, रोजगार और बराबरी के वास्ते’ केवल नारा नहीं, बल्कि छात्र-नौजवानों के भविष्य और सम्मान की लड़ाई का संकल्प है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता, युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार और जाति, वर्ग तथा लिंग आधारित भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार को बाजार के हवाले करने के बजाय सरकार को सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। राष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से इन मुद्दों पर देशव्यापी छात्र एकजुटता मजबूत करने के साथ भोजपुर में भी आंदोलन को गांवों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा। बैठक में आइसा के जिला सह सचिव रौशन कुशवाहा, चंदन दास, सुमित कुमार, साहिल अरोड़ा और विवेक कुमार; जिला उपाध्यक्ष राजेश, शिवाकांत, सागर पासवान, मुस्कान, अनूप और नीतू; जिला सोशल मीडिया प्रभारी सनी पासवान सहित वर्षा, विद्या, गौतम, मृत्युंजय, विराट, अनीता और राहुल समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
 
भोजपुर से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट |