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निरसा विधायक के चलते 25 चयनित पॉलिटेक्निक छात्रों का भविष्य दाव पर

8/11/2025 5:41:02 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Edited By - Umesh Tiwari 
 
Dhanbad : झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से राजकीय पॉलिटेक्निक निरसा में नामांकन लेने वाले 25 छात्रों का भविष्य आज स्थानीय विधायक के कारण दाव पर चढ़ गया है।
क्या है मामला 
परीक्षा के नियम के अनुसार पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा में सफल तमाम चयनित विद्यार्थियों को नामांकन लेने के लिए अपने साथ स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लाना अनिवार्य होता है। राजकीय पॉलिटेक्निक निरसा में आज राज्य के अन्य संस्थाओं की तरह नये चयनित विद्यार्थियों का नामांकन कि आज अंतिम तिथि है। स्थानीय विधायक निरसा रूप चटर्जी के दो लोग अपने स्टूडेंट के नामांकन को लेकर वहां पहुंचे तथा नामांकन प्रभारी डॉ एसपी यादव पर या दबाव बनाया कि वह बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के ही उक्त बच्चों का नामांकन ले ले, नियम के अनुकूल चूकिया संभव नहीं था उन्होंने उनका नामांकन लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया। प्रतिक्रिया में विधायक गुस्से में संस्थान के गेट पर ताला लगा दिया और चेतावनी दी जब तक उन विद्यार्थियों का नामांकन नहीं होता किसी का नामांकन नहीं होगा ऐसे में चयनित बच्चों जो वहां नामांकन लेने गए थे उनके समक्ष लौटने की स्थिति आ गई लेकिन विधायक इस बात पर अड़े रहे कि जब तक नामांकन इंचार्ज उनसे माफी नहीं मांगेगा नामांकन नहीं होगी। ऐसे में एक जनप्रतिनिधि विधायक के नाते लगभग 25 छात्रों का भविष्य दाव पर लग गया।
क्या कहा नामांकन प्रभारी ने
मामले में संस्थान के नामांकन प्रभारी डॉ एसपी यादव से बात करने पर उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी को कोई गलत बात नहीं बोला यही कहा कि बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के वह नामांकन नहीं ले सकते । ऐसे में गुस्से में आकर विधायक ने संस्थान में ताला लगा दी और दो बच्चों के चलते तमाम बच्चों का नामांकन रुक गया।
विधायक की प्रतिक्रिया
संवाददाता ने जब विधायक अरुप चटर्जी से बात की तो उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति उन्हें धमका कर चला जाय यह बर्दाश्त नहीं कर सकते। हर हाल में संबंधित नामांकन प्रभारी को उनसे माफी मांगनी होगी तभी संस्थान का ताला खोलूंगा।
क्या है नामांकन की प्रक्रिया 
डिप्लोमा हो या अभियंत्रण संस्थान उसमें चयनित अभ्यर्थियों का नामांकन परीक्षा बोर्ड के तिथि के अनुसार संबंधित तरीके से होता है तथा तिथि में किसी भी प्रकार का बदलाव परीक्षा बोर्ड के निर्णय के अनुरूप ही संभव होता है कहने का तात्पर्य है की तिथि में बदलाव के लिए बोर्ड की निर्णय अनिवार्य होती है और एक विधायक के चलते 25 बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाए यह कैसा जनप्रतिनिधित्व ?
 
उमेश तिवारी कोयलांचल लाइव डेस्क