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आसान नहीं होगी इस बार बिहार विधान सभा में NDA गठंबधन की जीत, सीट शेयरिंग पर खटास के आसार  
 

8/26/2025 1:17:56 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
 
 
बिहार में इस बार सत्ताधारी गठबंधन राष्ट्रिय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA ) की जीत  आसान नहीं होगी। यह स्थिति उक्त गठबंधन हीं नहीं बल्कि इसके मुख्य राजनीतिक दल भाजपा और जद यु दोनों हीं के लिए इस समय बिहार में चिंता की विषय बनी हुई है। इससे पूर्व वर्ष 2020 की चुनाव परिणाम से इस मामले में सबक लेने की जरूरत उक्त दोनों हीं राजनीतिक दल भाजपा और जद यु को हो रही है। भविष्य में पार्टी और व्यक्तिगत दोनों की हीं भलाई के लिए यह जरूरी भी है। केंद्रीय चुनाव परिणाम को सामने रख इस पर इस गठबंधन में आगामी चुनाव के लिए सीट आवंटन से पूर्व हीं मंथन शुरू कर दी है।आगामी बिहार विधानसभा चुनाव सीट शेयरिंग पर एनडीए में टकराव हो सकता है। 2010 और 2015 की विधानसभा चुनाव के अनुसार जनता दल चुनाव लड़ना चाह रही है। इधर भारतीय जनता पार्टी अब की विधानसभा चुनाव में बिहार में कुछ अलग करने का मन बनाई हुई है। सीट शेयरिंग पर इस बार बहुत से ऐसे सीट पर भी चुनाव लड़ने का भारतीय जनता पार्टी का इरादा है जहां पिछले चुनाव में स्थिति अच्छी रही और सत्ताधारी जनता दल यू को भाजपा का सहारा लेकर सत्तासीन  होने का मौका मिला। 2010 में 141 सीटों पर लादकर जदयू 115 सीट पर जीत हासिल की दूसरी ओर भाजपा 102 सीट पर लादकर 91 सिम जीती। 2020 की बात करें तो जदयू अपनी सूची 2010 और 15 को विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाना चाहती है। 5 साल के बाद जदयू ने 2015 में 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 71 सीट  जीती।  तत्कालीन सहयोगी राजद ने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 80 सिम जीती थी और महागठबंधन के तहत विपक्षी मोर्चे की सरकार बनी थी। लेकिन वह ढाई साल ही टकराने  के चलते गिर गई थी। तेजस्वी अपनी विरासत पर संबंध की महसूस करते हैं बिहार के डिप्टी सीएम बोले पापा की कमाई पर उपभोग कर रहे हैं। जदयू नेता 2020 का चुनाव था अपवाद जदयू के एन डी ए सूत्रों ने कहा कि पार्टी 2020 के चुनाव के नतीजे के आधार पर सीट बंटवारे की बातचीत नहीं करना चाहती क्योंकि एक अलग बात थी पार्टी ने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव हमारे लिए अपवाद था क्योंकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी हमारा खेल बिगड़ा था। चिराग पासवान ने वोट काटकर हमें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया वहीं कुशवाहा ने भोजपुर बक्सर रोहतास कैमूर और शाहाबाद के इलाके में हमें नुकसान पहुंचाया।  जदयू ने 2020 में 115 पर चुनाव लड़ा था लेकिन उसे केवल 43 सीट  ही मिली थी जबकि भाजपा ने 74 सिम जीतकर उसने बेहतर प्रदर्शन किया। अब जब पासवान और कुशवाहा दोनों इंडिया में वापस आ गए हैं तो जेडीयू अपने सहयोगियों के वोटो की वजह से बेहतर स्ट्राइक रेट तथा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कुछ जानकारों का मानना है कि 
 
 
 
बिहार के कम सीट से जीत वाली इन सीटों पर चल रही है मंथन :  
 
राजनीतिक हल्के में यह चर्चा जोरों पर चल रही है कि जनता दल यू पहले नंबर की पार्टी से तीसरे नंबर की पार्टी बन चुकी है और  जनता दल यू इन दिनों रिवाइवल की स्थिति में है। इस लिहाजन जनता दल यू के रणनीतिकार न केवल हारे हुए सीटों के पुनर्मूल्यांकन में लगी है बल्कि कम मतों से जीत वाले विधानसभा में भी जीत का समीकरण ढूंढकर नई रणनीति बनाने में जुट गई है। इस प्रकार बिहार के विभिन्न सीटों पर जहां जीत में मतों की अंतर्  कम थी  वहां जीत के बाद भी जनता दल यू हार के अनजाने भय से ग्रसित है। बिहार के इन सीटों  जनता दल यू का विशेष ध्यान है। 
 
बरबीघा विधानसभा :
 
बरबीघा विधानसभा 2020 का चुनाव काफी रोचक रहा था। तब जदयू के उम्मीदवार सुदर्शन को मात्र 110 मतों से जीत मिली थी। जदयू उम्मीदवार सुदर्शन को तब 39875 मत मिले थे और गजानंद शाही को 39765 मत मिले थे। तब लोजपा के उम्मीदवार मधुकर कुमार को लगभग 19 हजार मत मिले थे। इस बार की स्थिति थोड़ी भिन्न है। लोजपा रामविलास इस बार एनडीए में है तो वीआईपी ने इस बार महागठबंधन का दामन पकड़ लिया है। इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन।
 
भोरे विधानसभा :
 
वर्तमान में मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार का विधानसभा क्षेत्र भोरे विधानसभा रहा है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार ने सीपीएम माले के जितेंद्र पासवान को मात्र 462 मतों से परास्त किया था। तब सुनील कुमार को 74068 मत मिले थे और माले उम्मीदवार को 73605 मत मिले थे। इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन। 
 
परवत्ता विधानसभा :
 
जनता दल यू से उम्मीदवार डॉ संजीव कुमार भी परवत्ता विधानसभा से बड़े कम मतों से अंतर से जीता था। डॉ संजीव को तब 77226 मत मिले थे और राजद के दिगम्बर तिवारी को 76275 मत मिले थे। यहां जीत हार के बीच मात्र 951 मतों का अंतर था।इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन। 
 
महिषी विधानसभा :
 
जनता दल यू के उम्मीदवार गुंजेश्वर शह ने भी बड़ी मुश्किल से सीट निकाली थी। तब जदयू उम्मीदवार गुंजेश्वर साह को 66316 मत मिले थे। यहां से राजद के उम्मीदवार गौतम कृष्ण को 64686 मत मिले थे। इन दोनों के बीच हार जीत का अंतर मात्र 1630 मत रहा था। इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन। 
 
झाझा विधानसभा :
 
झाझा विधानसभा भी गत 2020 के विधानसभा चुनाव में बहुत कांटे की टक्कर का रहा था। जदयू के दामोदर रावत ने मात्र 1679 मतों से राजद के राजेंद्र प्रसाद को हराया था। दामोदर रावत को तब 76972 मत मिले थे और राजद के राजेंद्र प्रसाद को 75293 मत मिले थे। इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन।
 
रानीगंज विधानसभा :
 
रानीगंज विधानसभा चुनाव 2020 भी काफी टक्कर का रहा था। तब जदयू उम्मीदवार अचंभित ऋषिदेव को 81901 मत मिले थे और राजद के अविनाश मंगलम को 77717 मत मिले थे। यहां हार जीत का अंतर 4184 रहा था। इसलिए इस बार यहां चल रही है विशेष मंथन। 
 
वर्तमान में अब तक बिहार विधान सभा चुनाव की तिथि हीं घोषित नहीं हुई है। ऐसे में   राजनीतिक विशेषज्ञों के इन तमाम मंथनों के बावजूद इस बार बिहार विधान सभा चुनाव के परिणाम का ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो समय हीं बताएगा। 
 
 
उमेश तिवारी कोयलांचल लाइव डेस्क