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आरा कोचिंग डिपो ने ट्रेनों के रखरखाव में अत्याधुनिक तकनीक को विकसित किया नया कीर्तिमान स्थापित

8/28/2025 4:43:41 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ara  : पूर्व मध्य रेल के दानापुर मंडल अंतर्गत आरा कोचिंग डिपो ने ट्रेनों के रखरखाव के लिए अत्याधुनिक तकनीक को विकसित और उपयोग कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आई ओ टी) तकनीक से ट्रेनों के मेंटेनेंस के लिए स्मार्ट डिवाइस युक्त 15 अलग-अलग आधुनिक तकनीक विकसित किए गए हैं।  जिनसे सुरक्षा, रखरखाव के क्षेत्र में नवाचारों का प्रयोग कर अब ट्रेनों का रख रखाव पूर्णतः ऑटोमैटिक हो जाने से वाशिंग पीट पर ट्रेनों के मेंटेनेंस के दौरान समय की बचत हो रही है। वही यात्रा के दौरान तकनीकी खामियों की ससमय जानकारी मिलने से उसे समय रहते दूर दूर किए जा रहे है।  जिससे रेल यात्रियों का सफर अब सुरक्षित एवं संरक्षित हो गया है। इसे प्रोजेक्ट मशीन लर्निंग डिपो (एम एल डी) का नाम दिया गया है। बता दे कि अभी फिलहाल इसका सफल प्रयोग आरा कोचिंग डिपो से चल रही 4 जोड़ी प्राइमरी मेंटेनेंस और 3 राउंड ट्रिप की ट्रेनों में किया जा रहा है।  बता दे कि पहली तकनीक आई ओ टी आधारित ब्रेक सिलिंडर प्रैशर टेस्टिंग है जिसमें ब्रेक बाइंडिंग में आई खामी को तुरंत डिटेक्ट कर यात्रा के दौरान ही ठीक किया जा सकेगा। इसके लिए स्मार्ट ऐप्प और हनीवेल सेंसर्स का प्रयोग किया गया है। दूसरी तकनीक एयर ब्रेक सिस्टम के पाइप लाइन में एयर लीकेज को ठीक करने के लिए है जिसमें 124 अल्ट्रा साउंड सेंसर्स के माध्यम से ध्वनि तरंगों के जरिये लीकेज की जांच की जाती है। तीसरी तकनीक आई ओ टी स्मार्ट ऐप्प आधारित वॉटर लेवेल टेस्टिंग है जिसमें हाइड्रोस्टैटिक प्रैशर सेंसर्स के माध्यम से ट्रेन के कोचों में जलस्तर का पता चलता है जिससे यात्रा में पानी की कमी को अगले स्टेशन पर पूरा कर लिया जाता है। चौथी तकनीक में स्मार्ट डिवाइस के माध्यम से पावर कार में जेनेरटरों के लोड को जांचा जाता है। पाँचवीं तकनीक में वाई-फ़ाई के जरिये पिट लाइन में एयर ब्रेक सिस्टम में आई खामियों का पता लगाकर ठीक किया जाता है। छठी तकनीक में ओटोस्कोप कैमरा के जरिये स्प्रिंग हैल्थ को मॉनिटर किया जाता है। सातवीं तकनीक में कोच में लगे एफ एस डी एस वाल्व के खुले होने की जांच की जाती है। आठवीं तकनीक में 6 हजार लीटर के बौसर के माध्यम से पावर कार में ईंधन की सप्लाई मॉनिटर की जाती है। नौवीं तकनीक अभी प्रयोगिक तौर से गुजर रही है जिसमें लेसर के जरिये एलएचबी कोचों में सेंटर बफर कपलर की ऊंचाई को परखा जाता है और गड़बड़ी होने पर स्मार्ट डिवाइस स्वतः अलर्ट कर देता है। इससे यात्रा के दौरान कपलर टूटने और कोचों को अलग होने की आशंका से निजात मिल सकेगी ! दसवीं तकनीक में लेसर के जरिये कोचों के पहियों की सम्पूर्ण जांच होती है जिससे  ग्यारहवीं तकनीक अंडर गीयर रोलिंग इन कैमरा है जिसमें उच्च रेसोल्यूशन कैमरा कोच के निचली सतह से जांच करता है और इमेज को मॉनिटर पर भेजता है। बारहवीं तकनीक अभी प्रयोगिक परीक्षण में है जिसमें रेक के शंटिंग के लिए स्मार्ट कैमरा लगाए जाने हैं। वही बात करे तेरहवीं तकनीक की तो इसमें स्मार्ट डिवाइस के माध्यम से ट्रेनों के एक्सल का तापमान ऑटोमैटिक रिकॉर्ड कर निगरानी की जाती है जिससे अक्सर गर्मियों के दिनों में हॉट एक्सल की समस्या उत्पन्न होती है यानी ट्रेनों के पहिए में तामपान की वृद्धि हो जाती है जिससे कभी-कभी पहियों से चिंगारिया निकलने लगती है! यह तकनीक हॉट एक्सल की समस्या होने से पूर्व ही ट्रेन पर तैनात तकनीकी टीम को सूचित कर देगा।  चौदहवीं तकनीक में जब ट्रेन में अलार्म चेन पुल किया जाता है तो कोच के दरवाजे पर लगा बल्ब स्वतः जल उठता है तथा बल्ब में प्रवाहित इलैक्ट्रिक सप्लाई सेंसर के जरिये मोबाइल ऐप्प पर लाइव डाटा और लोकेशन भेज देता है। पंद्रहवीं तकनीक में कोचों में दुर्गंध को मेटल ऑक्साइड गैस सेंसर के माध्यम से पता लगाया जाता है। इन सभी उन्नत स्मार्ट तकनीक दानापुर मंडल के एडीआरएम (परिचालन) आधार राज की देखरेख में विकसित किए गए है और इसका सफल प्रयोग सर्वप्रथम आरा कोचिंग डिपो में किया जा चुका है तथा ये सभी पूर्णतः स्वदेशी और कम लागत वाले हैं। इनके जरिये ट्रेनों के रैक का रखरखाव शीघ्र तो होगा ही साथ ही ये सभी कम लागत वाली तकनीकें भी हैं जिससे रेलवे के द्वारा यात्रियों को सुरक्षित सफर का भरोसा मिलेगी। 
 
 
आरा से कोयलांचल लाइव के लिए आशुतोष पांडेय की रिपोर्ट