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JPSC की साख पर सवाल! 5 CS रैंक के IAS समेत 6 IAS, 2 IPS और 1 IFS भी नहीं बदल पाए आयोग की तस्वीर
7/22/2026 5:14:34 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Ranchi :
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) अपनी स्थापना के बाद से ही विवादों, अनियमितताओं और प्रशासनिक घोटालों के दलदल में फंसा रहा है. राज्य के युवाओं के भविष्य का निर्धारण करने वाला यह प्रतिष्ठित संस्थान खुद ही सबसे बड़े संकट का शिकार बना हुआ है. विडंबना यह है कि JPSC की कमान संभालने के लिए सरकार ने देश और राज्य के सबसे बड़े और अनुभवी प्रशासनिक चेहरों को मैदान में उतारा, जिनमें मुख्य सचिव (CS) रैंक के पांच वरिष्ठ IAS अधिकारी, IPS, IFS, न्यायिक सेवा के दिग्गज और प्रतिष्ठित शिक्षाविद शामिल रहे. लेकिन इसके बावजूद आयोग की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आ सका.
शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों का अनुभव भी रहा बेअसर :
इस आयोग को चलाने के लिए सरकार ने कभी प्रशासनिक अनुभव की कमी नहीं होने दी. भारतीय प्रशासनिक सेवा के सबसे वरिष्ठ और शीर्ष रैंक यानी मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों को इसकी कमान सौंपी गई. शिव बसंत, देवाशीष गुप्ता और के. विद्यासागर जैसे दिग्गज मुख्य सचिव रैंक के अधिकारियों ने आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद के वर्षों में पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी और एल. खियांग्यते जैसे प्रशासनिक मझाए हुए खिलाड़ियों को भी जेपीएससी की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी दी गई. इनके अलावा, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मेरी नीलिमा केरकेट्टा ने भी आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. बावजूद इसके प्रशासनिक दक्षता के ये बड़े हस्ताक्षर भी जेपीएससी को पारदर्शी, समयबद्ध और विवादमुक्त परीक्षा संचालन की पटरी पर लाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए.
IPS, IFS और न्यायपालिका के दिग्गजों का कार्यकाल भी विवादों में घिरा :
केवल IAS अधिकारी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, वन और न्यायपालिका के शीर्ष पदों से जुड़े लोग भी जेपीएससी के अध्यक्ष पद की शोभा बढ़ा चुके हैं, लेकिन आयोग का पीछा विवादों ने कभी नहीं छोड़ा. पुलिस सेवा से आने वाले आर.सी. कैथल और पूर्व IPS व अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले अमिताभ चौधरी ने भी आयोग के अध्यक्ष पद की कमान संभाली. भारतीय वन सेवा से पीसीसीएफ रैंक के अधिकारी डी.के श्रीवास्तव ने भी इस पद की जिम्मेदारी संभाली. न्यायपालिका की गरिमा से जुड़े न्यायिक सेवा के अफसर आलोक सेन गुप्ता को भी जेपीएससी अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी गई. कानून और व्यवस्था के इन बड़े जानकारों के कार्यकाल के दौरान भी जेपीएससी विवादों के भंवर से बाहर नहीं निकल पाया.
शिक्षाविदों और केंद्रीय अधिकारियों के प्रयोग भी हुए फेल :
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अलावा, राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर काम करने वाले शिक्षाविदों व अन्य महकमों के विशेषज्ञों को भी JPSC का अध्यक्ष बनाया गया ताकि अकादमिक दृष्टिकोण से आयोग में सुधार हो सके. सेंट्रल गवर्नमेंट के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. पीसी हेंब्रम को यह जिम्मेदारी दी गई. वहीं, शिक्षा जगत से ताल्लुक रखने वाले डॉ. दिलीप प्रसाद, डॉ. परवेज हसन और ए.के. चट्टोराज जैसे शिक्षाविदों को भी आयोग की कुर्सी सौंपी गई. शिक्षाविदों के हाथों में आयोग की कमान आने के बाद यह उम्मीद थी कि शैक्षणिक शुचिता और परीक्षाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा. लेकिन यह प्रयोग भी धरातल पर दम तोड़ गया. न तो उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता आ सकी और न ही समय पर कैलेंडर जारी हो सका. शिक्षाविदों का कार्यकाल भी विवादों, हंगामों और अभ्यर्थियों के आंदोलन की भेंट चढ़ गया.
कौन अध्यक्ष किस सेवा से रहे -
डॉ. पी.सी. हेंब्रम: सेंट्रल गवर्नमेंट के वरिष्ठ अधिकारी, डॉ. दिलीप प्रसाद: शिक्षाविद्, आलोक सेन गुप्ता: न्यायिक सेवा के अनुभवी अधिकारी, आर.सी. कैथल: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), डॉ. परवेज हसन: शिक्षाविद्, शिव बसंत: आईएएस, मुख्य सचिवरैंक के अफसर, देवाशीष गुप्ताः आईएएस, मुख्य सचिव रैंक के अफसर, के. विद्यासागर: आईएएस, मुख्य सचिव रैंक के अफसर, डीके. श्रीवास्तव: भारतीय वन सेवा (आईएफएस), पीसीसीएफ रैंक, ए.के. चट्टोराज: शिक्षाविद्, अमिताभ चौधरी: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), सुधीर त्रिपाठी: आईएएस, मुख्य सचिव रैंक के अफसर, मेरी नीलिमा केरकेट्टा: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, एल. खियांग्यते: आईएएस, मुख्य सचिव रैंक के अफसर
रांची से कोयलांचल लाइव के लिए प्रशांत जयवर्धन की रिपोर्ट
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