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गया में भगवान भोले के भक्त ने बनाई 30 फीट लंबी और डेढ क्विंटल वजनी कांवर, 30 बार डाक बम के रूप में जा चुके हैं देवघर, इस बार जाएंगे बैजू धाम
7/30/2026 3:57:44 PM IST
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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
गया :
30 जुलाई से सावन का पावन महीना शुरू हो जाएगा। शिव भक्तों के 'बोल बम' के नारे गुंजायमान होने लगेंगे। शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगेगी। भगवान भोलेनाथ के एक से बढ़कर एक भक्त हैं। इन्हीं में से एक हैं गया जिले के गुरारू निवासी सुदर्शन कुमार, जो अपनी अनोखी शिवभक्ति के लिए जाने जाते हैं। सुदर्शन अब तक 30 बार डाक बम के रूप में बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) की यात्रा कर चुके हैं। इस बार उन्होंने 30 फीट लंबी और लगभग डेढ़ क्विंटल वजनी विशेष कांवर तैयार की है। हालांकि आर्थिक कारणों से इस बार वे देवघर नहीं जा सकेंगे। इसके बजाय वे बिहार के मिनी देवघर कहे जाने वाले बैजू धाम (गुरुआ)में जलाभिषेक करेंगे। सुदर्शन ने अपने साथियों की मदद से यह 30 फीट लंबी कांवर तैयार की है। पिछले एक महीने से वे इसे बनाने में जुटे हुए थे और अब यह लगभग तैयार हो चुकी है। वे 2 अगस्त को कांवर लेकर रवाना होंगे और 3 अगस्त, सावन की पहली सोमवारी को बाबा बैजू धाम में जल अर्पित करेंगे। उनकी टीम में स्थायी रूप से 11 सदस्य शामिल रहेंगे। इसके अलावा जो भी श्रद्धालु यात्रा में शामिल होकर कांवर को कंधा देना चाहेंगे, उनका भी स्वागत रहेगा। सुदर्शन को उम्मीद है कि यात्रा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु उनके साथ जुड़ेंगे। इस विशाल कांवर को तैयार करने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। मजदूरी कर पैसे जुटाए, फोटोग्राफी से होने वाली कमाई बचाई और अपनी कई जरूरतों को टालकर रुपये इकट्ठे किए। पिछले दो-तीन वर्षों से वे 52 फीट या 30 फीट लंबी कांवर बनाने की योजना बना रहे थे, लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने 30 फीट लंबी कांवर बनाने का फैसला किया। कांवर को सजाने का सामान और गंगाजल लाने के लिए वे सुल्तानगंज गए। अब तक इस कांवर पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। अभी भी कुछ खर्च बाकी है, जिसकी चिंता उन्हें है। इसके बावजूद उन्हें भगवान भोलेनाथ पर पूरा विश्वास है कि आगे की व्यवस्था भी हो जाएगी।सुदर्शन बचपन से ही भगवान शिव के भक्त रहे हैं। वे 13 वर्ष की उम्र में पहली बार कांवर लेकर देवघर गए थे। इसके बाद लगातार 30 वर्षों तक डाक बम के रूप में देवघर जाकर जलाभिषेक करते रहे। केवल पिछले तीन वर्षों से वे देवघर नहीं जा सके। इसकी वजह उनकी मां का निधन और उनका पैर टूट जाना रहा। इस बार उन्होंने 30 फीट लंबी और डेढ़ क्विंटल वजनी कांवर बनाकर देवघर जाने की योजना बनाई थी। लेकिन खर्च का आकलन करने पर पता चला कि देवघर यात्रा के लिए करीब दो लाख रुपये की आवश्यकता होगी, जो उनके पास नहीं थे। इसलिए उन्होंने गुरुआ स्थित प्रसिद्ध बाबा बैजू धाम में जलाभिषेक करने का निर्णय लिया। बैजू धाम गुरारू से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे बिहार का मिनी देवघर कहा जाता है। सावन के महीने में यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवर लेकर जल चढ़ाने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान भोलेनाथ स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। सुदर्शन बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति को देखकर कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लोगों को विश्वास नहीं था कि वे इतनी गरीबी में 30 फीट लंबी और डेढ़ क्विंटल वजनी कांवर तैयार कर पाएंगे। लेकिन भगवान भोलेनाथ की कृपा और अपने साथियों के सहयोग से उन्होंने यह सपना पूरा कर लिया। वे चाहते हैं कि इस कांवर यात्रा के माध्यम से क्षेत्र में शांति, समृद्धि और खुशहाली का संदेश जाए तथा भगवान भोलेनाथ सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। इस विशेष कांवर में करीब 70 किलोग्राम से अधिक वजन का हरा बांस लगाया गया है। इसके अलावा फोम, गद्दे, बड़े घुंघरू, धार्मिक शस्त्र और अन्य सजावटी सामग्री भी लगाई गई है। कांवर में 50 से 60 किलोग्राम से अधिक गंगाजल भी रखा जाएगा। यदि यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है तो गंगाजल की मात्रा भी बढ़ाई जाएगी। सुदर्शन बताते हैं कि यदि उनके पास पर्याप्त पैसे होते तो वे निश्चित रूप से देवघर जाते। लेकिन उनका मानना है कि भगवान हर जगह हैं और बाबा बैजू धाम की महिमा भी अपरंपार है। इसलिए वे 2 अगस्त को गुरारू से यात्रा शुरू करेंगे और 3 अगस्त, सावन की पहली सोमवारी को बाबा बैजू धाम में जलाभिषेक करेंगे। सुदर्शन केवल कांवर यात्रा ही नहीं करते, बल्कि हर सावन में देवघर मार्ग पर लगने वाले एक शिविर में भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग देते हैं। उनके गुरु के मार्गदर्शन में हर वर्ष यह शिविर लगाया जाता है। वे कभी बादाम, कभी चावल-चीनी और कभी अन्य आवश्यक सामग्री भेजते हैं। अपनी आर्थिक क्षमता से बढ़कर भी वे शिवभक्तों की सेवा करने का प्रयास करते हैं।
गया से कोयलांचल लाइव के लिए मनोज कुमार की रिपोर्ट
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