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20 सूत्री मांगों को लेकर किसान-मजदूर संगठनों का जेल भरो आंदोलन

8/10/2026 5:34:46 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Gaya : 20 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को गया में विभिन्न किसान-मजदूर और जनसंगठनों ने जेल भरो आंदोलन किया। चारों लेबर कोड रद्द करने, किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने समेत कई मांगों को लेकर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। आंदोलन में बिहार राज्य किसान सभा, सीटू, खेत मजदूर यूनियन, जनवादी महिला समिति, भारत की जनवादी नौजवान सभा, आंगनबाड़ी समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलन की शुरुआत गांधी मैदान से हुई। यहां से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में झंडे और मांगों से जुड़े बैनर लेकर जुलूस की शक्ल में निकले। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए समाहरणालय पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘किसान-मजदूर, नौजवान-महिला एकता जिंदाबाद’ के नारे से इलाका गूंजता रहा। समाहरणालय पहुंचने के बाद आंदोलनकारी सड़क पर बैठ गए, जिससे कुछ देर के लिए आवागमन बाधित रहा। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। इसके बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देना शुरू किया। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को प्रिजनर वैन में बैठाया, जबकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पैदल सिविल लाइंस थाना पहुंचे और वहां भी गिरफ्तारी दी। हालांकि, देर तक पुलिस की ओर से गिरफ्तार लोगों की संख्या की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
 
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता अजय कुमार वर्मा ने किया। आंगनबाड़ी नेत्री मंजू कुमारी समेत कई अन्य नेताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। किसान नेता अजय कुमार ने बताया कि 28 और 29 जुलाई को दिल्ली में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर में जेल भरो आंदोलन का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत गया में भी आंदोलन किया गया। उन्होंने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य देने और सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी की मांग की। साथ ही किसान और खेत मजदूरों का कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई गई।
 
चारों लेबर कोड वापस लेने की मांग
आंदोलनकारियों ने चारों लेबर कोड रद्द करने, ठेका, संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने तथा सभी स्वीकृत पदों पर नियमित बहाली की मांग की। आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया और अन्य योजना कर्मियों को स्थायी करने के साथ तत्काल 26 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय देने की मांग भी रखी गई।
 
बिजली, जमीन और राशन से जुड़े मुद्दे
प्रदर्शनकारियों ने बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस लेने की मांग की। बटाईदार और पट्टेदार किसानों का निबंधन कर उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ देने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीण क्षेत्रों का होल्डिंग टैक्स वापस लेने, स्टेट हाईवे पर प्रस्तावित टोल टैक्स बंद करने और भूमिहीन एवं गृहविहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन देने की मांग की गई। इसके अलावा राशन कार्ड से नाम काटना बंद करने और खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने की मांग भी आंदोलनकारियों ने रखी।
 
गया को सुखाड़ घोषित करने की मांग
आंदोलनकारियों ने गया जिले को सुखाड़ घोषित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की। अंचलों में परिमार्जन और जमाबंदी से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने, पेट्रोलियम और गैस की कीमतें कम करने, महिला, दलित और कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई।
 
गया से कोयलांचल लाइव के लिए मनोज कुमार की रिपोर्ट