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डुमरा राजबाड़ी में  पुरानी परंपरा के साथ आज दुर्गा मां शारदे को डोली में राज परिवार नेतलाब से परंपरा के साथ ढोल नगाड़े के लाया गया...

10/17/2026 4:40:53 PM IST

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कोयलांचल लाइव डेस्क, Koylachal Live News Team
Baghmara : डुमरा राजबाड़ी में इस वर्ष भी ऐतिहासिक और पारंपरिक विधि-विधान के साथ माँ शारदीय दुर्गा पूजा का घाट में बिठाकर डोली में तलाब से लाया गया। पुजारियों और आचार्यों के अनुसार, यह पूजा लगभग 350 वर्षों से अधिक पुरानी है और इस क्षेत्र की सबसे प्राचीन दुर्गा पूजाओं में से एक मानी जाती है। आचार्य शीतल कुमार मिश्रा ने बताया कि इस क्षेत्र में राजवाड़ी मे दुर्गा पूजा विधि विधान से किया जाता है इस पूजा की शुरुआत महाराजा प्रतापनारायण सिंह के समय हुई थी। इसके बाद उनके पूर्वजों राजा बनवारी लाल सिंह, राजा नीलकंठ नारायण सिंह, राजा कामाख्या नारायण सिंह, स्वर्गीय राजा सत्येंद्र नारायण सिंह और वर्तमान में उनके सुपुत्र व दुर्गा पूजा के सेवायत राजा मृगेंद्र नारायण सिंह की देखरेख में समस्त पूजा व्यवस्था संचालित होती है। जिसमे की सरस्वती कला केंद्र का भी अहम भूमिका रहती है। ​यहां शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तक विशेष अनुष्ठान होते हैं। षष्ठी के दिन नवपत्रिका आमंत्रण और बिल्व वृक्ष के नीचे देवी का बोधन व अधिवास किया जाता है।  ​षष्ठी के दिन परंपरा के अनुसार राजा स्वयं झाड़ू लगाकर और जल का प्रोक्षण कर नवपत्रिका को बिल्व वृक्ष तक ले जाते हैं। महासप्तमी को नवपत्रिका को पूर्वजों द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक राजा तालाब में स्नान कराकर मंदिर की वेदी पर कलश स्थापित किया जाता है। अष्टमी की पूजा यहां सबसे प्रमुख मानी जाती है। इस दिन राजमाता और राज परिवार की महिलाएं अपने हाथों से भोग बनाती है। 
 
बाघमारा से  कोयलांचल लाइव के लिए काशीनाथ रवानी की रिपोर्ट।